It act 66a क्या भारत फिर से लाने वाला है ?
It act 66a
2015 में ही टैंक को सुप्रीम कोर्ट ने स्ट्रक डाउन कर दिया था इसके अंतर्गत यदि कोई व्यक्ति किसी दूसरे व्यक्ति को ऑफेंसिव मैसेज भेजता है, गाली गलौज करना, किसी दूसरे व्यक्ति को झूठी इंफॉर्मेशन, उसकी इंसल्ट करने के लिए उसको धमकाने के लिए इस प्रकार की सूचनाएं भेजी जाती थी ऐसे अपराधों के लिए इस सेक्शन में सजा का प्रावधान किया गया है.
इसका मिस यूज बहुत ज्यादा होने लगा था इसी को देखते हुए 2015 में श्रेया सिंघल केस में इस कानून को खत्म कर दिया गया था क्योंकि यह फ्रीडम ऑफ स्पीच को बाधित करता है .
आज भी खत्म होने के बाद भी इस धारा के अंतर्गत में केस दर्ज किए जा रहे थे और कारण यह बताया जा रहा था कि पुलिस वालों को इसकी जानकारी नहीं है कि यह कानून खत्म हो गया यहां तक की लोकल लेवल पर जो जुडिशल मजिस्ट्रेट रहते हैं वह भी इस प्रकार के अपराधियों को गिरफ्तारी का आदेश दे देते हैं पुलिस वालों को .
हाल ही में एक इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया था यूनाइटेड नेशंस के द्वारा जिसमें मुद्दा उठाया गया था साइबर क्राइम से निपटने के लिए एक इंटरनेशनल सिटी आना चाहिए इस दौरान भारत ने भी अपनी आवाज उठाई थी । जिसमें इंडिया का कहना था कि ऑफेंसिव मैसेज को क्रिमनालाइज कर दिया जाए ।
यूनाइटेड किंगडम और अदर कंट्री ने भारत का विरोध किया है भारत का यह नियम फ्रीडम ऑफ स्पीच का उल्लंघन करता है इसलिए इस बात को नहीं माना जाएगा अलग ही भारत ने यहां पर अपना मत रखा है जरूरी नहीं है कि भारत की बात मानी ही जाएगी फिर भी अलग-अलग देशों की अलग-अलग राय सामने आ रही है ।
यदि इंटरनेशनल कानून बन ही जाएगा इसके बाद भी हमारे देश में इस इंटरनेशनल कानून के ऊपर संसद में कानून बनाना पड़ेगा तब जाकर यह कानून हमारे देश में लागू होगा अपने आप ही लागू नहीं होगा ।
कौन कौन से केस में सुप्रीम कोर्ट ने इंटरनेशनल लॉ को ध्यान में रखते हुए निर्णय दिया है
💐विशाखा वर्सेस स्टेट ऑफ राजस्थान 1997 का केस
💐नेशनल लीगल सर्विस अथॉरिटी वर्सेस गवर्नमेंट ऑफ इंडिया 2014 का केस
💐केएस पुत्तास्वामी वर्सेस यूनियन ऑफ इंडिया 2018 का केस
अब ऑलरेडी से जब इस बात पर निर्णय सुप्रीम कोर्ट दे चुका है 2015 में इस कानून को खत्म कर चुका है इसी के ऊपर इंटरनेशनल लॉ आता है तो सुप्रीम कोर्ट अपने पुराने निर्णय को ऐसे ही खत्म करने वाला नहीं है ।
आर्टिकल 253
इंटरनेशनल ट्रीटीज फिर एग्रीमेंट को भारत में लागू करने के लिए भारत की संसद कानून बना सकती है ।
और यदि हमारी संसद इस सब्जेक्ट पर कानून बना भी ले तो पिछले निर्णय 2015 के निर्णय में सुप्रीम कोर्ट ने जो अरगुमेंट दिए थे उसके आधार पर यदि संसद आज भी वह कानून बना लेती है तो सुप्रीम कोर्ट उसको भी खत्म कर देगा ।
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