भारत की हायर जुडिशरी में रिफॉर्म्स की जरूरत
सुप्रीम कोर्ट में जजों की रिटायरमेंट की उम्र 65 साल होती है अब सरकार चाहती है कि जजों की रिटायरमेंट की उम्र 65 से 67 साल कर दी जाए.
जस्टिस यूयू ललित आने वाले चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया बनने वाले अगस्त के महीने में . यदि रिफॉर्म हो जाता है तो - 2 महीने में 2 साल 2 माह एक्स्ट्रा हो जायेगा । इसके चंद्रचूड़ बनेंगे तू इनकी जो आने वाली डेट है वह भी चेंज हो जाएगी नए बनाए गए कानून के हिसाब से। इनकी डेट निकल रही है नए कानून के हिसाब से नवंबर 2024।
सरकार को यदि सुधार लाने ही हैं हायर जुडिशरी में तो कई सारे और कदम भी उठाए जा सकते हैं
1 हाईकोर्ट में जजों की रिटायरमेंट की उम्र होती है 62 साल वहीं सुप्रीम कोर्ट में देखा जाए तो जजों की रिटायरमेंट की उम्र 65 साल है । इसका नेगेटिव इंपैक्ट पड़ता है कि यहां के जज यह सोचते हैं कि हम कैसे भी करके सुप्रीम कोर्ट पहुंच जाएं ।
एमसी चगला और पीवी मन्नार जैसे कुछ ऐसे भी हाई कोर्ट के जज हुए हैं जिन्होंने सुप्रीम कोर्ट जाने से मना कर दिया है ।
जब 60 साल की उम्र में कोई व्यक्ति किसी कारपोरेट या फिर कंपनी में अच्छे से काम कर सकता है तो वह कैसे हाई कोर्ट के लिए 60 साल का व्यक्ति बूढ़ा हो गया।
सुप्रीम कोर्ट के जज रिटायरमेंट होने के बाद क्या करते हैं -
पहली - एन जी ओ बगैरा में काम करने लग जाना
दूसरा - सरकारी यदि किसी प्रकार की कमेटी का गठन करती है तो उस कमेटी में यह जज काम करना चालू कर देते , ट्रिब्यूनल , लोकपाल।
तीसरा - ऐसी कैटेगरी के जज आर्बिट्रेशन का काम चालू कर देते । आर्बिट्रेशन का मतलब होता है जुडिशल सिस्टम से बाहर जाकर के किसी डिस्प्यूट को सुलझाना ।
2 कैडर ऑफ रिटायर जज फॉर पब्लिक सर्विस - फिर जब कहीं भी जजों के अपॉइंटमेंट की जरूरत पड़े इसके डर से जजों को उठाना है और उन से काम करवाना है इसके लिए सरकार को वेतन भत्ते और जो सुविधाएं हैं देना पड़ेगा ।
लेकिन यदि कोई जज इस टेंडर में शामिल हो गया है तो उसको कोई प्राइवेट काम करने नहीं दिया जाना चाहिए । जैसे कि आर्बिट्रेशन का काम ।
यदि कोई जज यह सोचता है कि हमें आर्बिट्रेशन में ही काम करना है तो ऐसे जज को कॉलेजियम सिस्टम में नहीं डालना चाहिए ।। कॉलेजियम सिस्टम में चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया इसके साथ सथ में चार जज होते हैं जो कि काफी सीनियर होते हैं।
कॉलेजियम ही निर्धारित करता है कि हाईकोर्ट में या सुप्रीम कोर्ट में किस जज की नियुक्ति की जाएगी ।
3 आज के समय में यह नियम चलता है कि जो भी सबसे ज्यादा उम्र दराज सीनियर मोस्ट जज है वही व्यक्ति चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया बनता है । लेकिन ऐसी बात संविधान में कहीं पर भी नहीं लिखी है । यह सिस्टम चला आ रहा है 1993 की सेकंड जज केस के बाद ।
124 इस आर्टिकल में केवल यह लिखा है कि राष्ट्रपति जजों की नियुक्ति करेंगे । और यह जज अपनी सेवा तब तक देंगे जब तक कि उनकी उम्र 65 साल नहीं हो जाती है ।
इसके लिए राइटर की तरफ से सजेशन दिया जाता है हाई कोर्ट की जो जज रिटायर हो रहे हैं उनको भी चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया के रूप में नियुक्ति का मौका दिया जा सकता है । इससे हाईकोर्ट की वैल्यू बढ़ जाएगी और जो उम्र बढ़ाने वाली बातचीत करी जा रही है वह भी इसमें शामिल हो जाएगा ।
अमेरिका का एग्जांपल देखने तो 17 में से पांच चीफ जस्टिस ऐसे थे जो कि एसोसिएट जज के रूप में काम कर रहे थे बाकी जो आए थे वह बिल्कुल नए थे आकर के चीफ जस्टिस बन गए। थे
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