एन्टीट्रैफिकिंग बिल

एन्टीट्रैफिकिंग बिल

एंटी ट्रैफिकिंग बिल का ड्राफ्ट वूमेन चाइल्ड एंड डेवलपमेंट मिनिस्ट्री के द्वारा तैयार किया गया था जिसका उद्देश्य था मानव की होने वाली तस्करी को रोकना । 

2018 में एक बिल लाया गया   जिसका नाम था ट्रैफिकिंग ऑफ द पर्सन प्रोटेक्शन प्रीवेंशन रिहैबिलिटेशन एक्ट 2018 राज्यसभा में पास होने के पहले ही यह भी लेपस हो गया था ।

ड्राफ्ट ट्रैफिकिंग इन पर्सन प्रीवेंशन केयर रिहैबिलिटेशन बिल 2021

1 यह बिल देश के सभी लोगों पर नाग लागू होता है चाहे वह देश के अंदर रहते हो चाहे वह देश के बाहर रहते हो । बाहर से रहने वाला व्यक्ति जो हमारे देश में रह रहा है उसके ऊपर भी यह कानून लागू होता है जिसको स्टैटलेस पर्सन भी बोलते हैं । 
एग्जांपल की तौर पर यदि बांग्लादेश से लड़कियों को ट्रैफिकिंग करके भारत लाया जाता है उस कंडीशन में भी यह कानून लागू होगा ।

2 पहले जांच एजेंसियों को यह साबित करना पड़ता था कि व्यक्ति को एक जगह से दूसरी जगह ट्रांसपोर्ट करके लाया गया है लेकिन नए कानून में प्रावधान अब जांच एजेंसियों को इस बात को साबित करने की जरूरत नहीं है ।

3 कितने प्रकार के काम है जिसको एक्सप्लोइटेशन में शामिल किया जाएगा इस कानून में शामिल किया गया है जैसे कि
💐पोर्नोग्राफी 
💐फिजिकल एक्सप्लोइटेशन 
💐जबरदस्ती लेवरी का काम, 
💐स्लेवरी , 
💐अंगों को हटा देना ,
💐 इल्लीगल तरीके से ट्रक का ट्रायल करना
 💐इल्लीगल तरीके से बायोमेडिकल रिसर्च करना यह सारे प्रावधान इसमें शामिल किए गए

4  गवर्नमेंट सर्वेंट ,डॉक्टर ,पैरामेडिकल स्टाफ या फिर कोई भी जो अथॉरिटी की पोजीशन में है सब के ऊपर यह कानून लागू होता है ।

5 क्रॉस बॉर्डर में भी अपराध हो रहा है तो उसके लिए जांच एजेंसी जिम्मेदार रहेगी एनआईए

सजा के प्रावधान 
की बात करें तो इसमें मिनिमम 7 साल और अधिकतम 10 साल की सजा का प्रावधान है इसके अलावा जुर्माना की बात करें 5 लाख यदि किसी व्यक्ति ने 1 से ज्यादा बच्चों की तस्करी की है तो उसके लिए लाइफ इंप्रिजनमेंट या फिर डेट पेनाल्टी का प्रावधान तक किया गया है ।

इसके अलावा यदि कोई व्यक्ति तस्करी के द्वारा कमाई करके संपत्ति बना लेता है तो उसकी संपत्ति को जब्त करने का प्रावधान किस में किया

इस नियम कानून को लागू 
करवाने के लिए नेशनल एंटी ट्रैफिकिंग कमेटी बनाई जाएंगे इसके अलावा स्टेट लेवल पर भी इसी प्रकार की कमेटी बनाई जा सकती है

क्रॉस बॉर्डर तस्करी को कम करना अपराधियों में भय पैदा करना

इसकी कुछ कमियां भी है जैसे

 कि जबरदस्ती लेवरिंग करवाना सेक्सुअल एक्सप्लोइटेशन करवाना इनके लिए ऑलरेडी से नियम कानून हमारे देश में बने हैं यहां पर यह वाले कानून लागू होंगे या फिर पुराने कानून लागू होंगे इस बात का कन्फ्यूजन हो जाता है

इसमें पीड़ित व्यक्ति को रिहैबिलिटेशन करने का कोई प्रावधान नहीं किया गया है इसके लिए समाज आधारित रिहैबिलिटेशन की व्यवस्था करना जरूरी है ताकि समाज में अच्छे से रह सके समाज उसको अपना सके।

इस बिल पर पीड़ित व्यक्ति पर फोकस नहीं किया गया है अपराधी व्यक्ति पर ज्यादा फोकस किया गया है

तस्करी वाले केस में मोस्टली  जो अपराधी है वह छूट जाते हैं उनको सजा नहीं मिल पाती है 10.6% hai . सजा होती। है ।

महाराष्ट्र और तेलंगाना में सबसे ज्यादा देखे गए हैं दोनों में 184 के प्रत्येक राज्य में आज प्रदेश में 171 केरल में 166 झारखंड में 140 और राजस्थान में 128 केस दर्ज हुए ।

2020 के डाटा के अनुसार कुल पीड़ित व्यक्तियों की संख्या की लगभग 4.5 हजार आधी बच्चे 18 साल से कम उम्र के थे। ।




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