हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट के माध्यम से भारत और नेपाल केमजबूत होते रिश्ते

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इसमें हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट पर फोकस किया गया . वेस्ट seti डैम में 750 mw हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट लगाया जाएगा । यह सेती नदी पर बनेगा । यह काम नेशनल हाइड्रो पावर कारपोरेशन अपने हाथ में ले रही है । इसके पहले इस प्रोजेक्ट का एग्रीमेंट चाइना की एक कंपनी के साथ में किया गया। इस डैम में पानी को दूर करके रखा जाता है ताकि बड़ी मात्रा में बिजली का उत्पादन किया जा सके यहां पर सेती रिवर से पानी आता है ।

यदि यह प्रोजेक्ट कंप्लीट हो जाता है तो यहां से बिजली इंडिया को एक्सपोर्ट कहीं जाएगी इसके अलावा नेपाल को भी इकतीस परसेंट बिजली की आपूर्ति हो पाएगी ।
जो लोग इस प्रोजेक्ट के चलते चलते प्रभावित हुए हैं उनको हर महीने 10 मिलियन नेपाली रूपीस इसके साथ सथ में 30 यूनिट बिजली फ्री हर महीने दिया जाएगा

एक प्रश्न यहां पर यह उठता है कि चाइना की कंपनी इस प्रोजेक्ट से आखिर बाहर क्यों हो गई ?

चाइना का कहना था इसमें पैसा बहुत ज्यादा लग जाएगा और जितना पैसा लगेगा उस पैसे की रिकवरी हो नहीं पाएगी ।

नेपाल ने इंडिया को प्राथमिकता क्यों दी क्योंकि नेपाल के लिए बिजली के एक्सपोर्ट के मामले में इंडिया एक मार्केट है दूसरी बात हाल ही कीजो गवर्नमेंट है वह सोचती है कि चाइना का प्रभाव हमारे देश में काम हो चाइना द्वारा बनाए गए प्रोजेक्ट को उतना ज्यादा तवज्जो नहीं दी गई ।

नेपाल के पास बहुत बड़ी क्षमता है हाइड्रोपावर को जनरेट करने की क्योंकि यहां पर 6300 से भी ज्यादा छोटी-बड़ी नदियां हैं और इसकी कैप सिटी देखा जाए तो 83000 मेगा वाट की हाइड्रो इलेक्ट्रिक जनरेट की जा सकती है ।

इसके बावजूद भी नेपाल में पावर क्राइसिस होते रहता है वर्तमान में कैप सिटी देखा जाए तो नेपाल की 2000 मेगावाट है । इससे भी कम नेपाल इलेक्ट्रिसिटी को जनरेट कर पाता है । हाल के समय में देखा जाए तो नेपाल 324 मेगा वाट बिजली इंडिया को एक्सपोर्ट करता है ।
लेकिन पिछला रिकॉर्ड देख है तो कुछ सालों से नेपाल खुद हमारे देश से बिजली खरीदा करता था।

नेपाल का कहना है कि इंडिया दावा तो बड़े-बड़े कर देता है लेकिन इंप्लीमेंटेशन इंडिया का बहुत स्लो रहता है । उदाहरण के तौर पर देखें महाकाली ट्रीटी 1986 साइन हुई थी जिसके अंतर्गत में 6480 मेगा वाट बिजली उत्पादन की जानी थी । लेकिन अभी तक इंडिया इसकी रिपोर्ट लेकर के नहीं आया है डीपीआर रिपोर्ट लेकर के नेपाल नहीं गया है ।

इसके अलावा मल्टीनैशनल जीएमआर कंपनी करनाली प्रोजेक्ट को लेकर के आगे नहीं बढ़ पाई ।

हालांकि कुछ ऐसे प्रोजेक्ट हैं जिनको लेकर की तेजी से काम चालू है जैसे कि

900 मेगा वाट का अरुण 3 प्रोजेक्ट यह पूर्वी नेपाल के संखुवासभा एरिया में है । स्कोर इंडिया की सतलुज विद्युत निगम द्वारा इंप्लीमेंट किया जा रहा है बूट योजन द्वारा । इसकेके अंतर्गत बेल्ट ऑपरेट एंड ट्रांसफर स्कीम अपनाई जाती है इसका फाउंडेशन 2018 में रखा गया था और यह कंप्लीट हो जाएगी 2023 तक।

इसके अलावा इंडिया नेपाल को अरुण 4 प्रोजेक्ट भी देने के लिए सोच रहा है । यह प्रोजेक्ट भी सतलुज विद्युत निगम लिमिटेड को दिया जाएगा ।
समस्या वाली बात यह है वर्तमान में देखा जाए भारत और नेपाल के रिलेशन केवल फोकस कर रहे हैं इलेक्ट्रिसिटी के मामले में ।

 जब कोई प्रोजेक्ट किस रिवर के ऊपर बनाया जाता है तो वह प्रोजेक्ट मल्टी यूज वाला होना चाहिए जैसे कि फ्लड कंट्रोल इरीगेशन फिशरीज यह सभी चीजों में इसका यूज होना चाहिए ।

अभी हाल ही में देखा जाए तो नए प्रधानमंत्री नेपाल के बने हैं उनके और भारत के रिश्ते बहुत अच्छे चलता है हाल ही में जो हमें प्रोजेक्ट मिला है उस पर भी हम टाइम पर इंप्लीमेंट कर लेते हैं तो नेपाल हमें और भी प्रोजेक्ट दे सकता है ।





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