राइट टू कंपनसेशन कैदियों के लिये जरूरी है ?
राइट टू कंपनसेशन
इंग्लिश के एक ज्यूरी थे विलियम ब्लैक स्टोन उनका कहना था भले ही 10 अपराधी छूट जाए लेकिन एक भी निर्दोष व्यक्ति को सजा नहीं होना चाहिए।
आज के समय में ज्यादातर देशों में इसी सिद्धांत को अपनाया जाता है जस्टिस इंश्योर करते समय लेकिन प्रैक्टिकल तौर में देखे तो हमारे जस्टिस सिस्टम में यह प्रिंसिपल बहुत इग्नोर किया जा रहा है
कुछ रिकॉर्ड यहां पर हम देख सकते हैं वर्ल्ड फ्री ट्रायल/ रिमांड इंप्रिजनमेंट
2020 के आंकड़ा है जिसमें कहा जाता है इंडिया इंडिया की रैंकिंग थी 15 इसमें शामिल थी 217 कंट्रीज इसमें बेस बनाया गया था अंडर ट्रायल पापुलेशन यह रिपोर्ट जारी की गई थी वर्ल्ड फ्री ट्रायल/ रिमांड इंप्रिजनमेंट लिस्ट द्वारा ।
यह बात बताती है इस इश्यू का महत्व
इसके अलावा एक और डाटा हम देखने वाले हैं नेशनल ज्यूडिशल डाटा ग्रिड
हाईलाइट करता है लगभग 30.8 मिलियन क्रिमिनल केस ऐसे हैं जिनकी प्रोसेडींग चल रही है डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में । इनमें से 8 मिलियन कि ऐसे हैं जो कि पेंडिंग है 5 साल से भी ज्यादा इसका मतलब यह हुआ जितने भी क्रिमिनल केस चल रहे हैं सेशन कोर्ट में उसके 25 परसेंट केस 5 साल से भी ज्यादा से पेंडिंग है ।
नेशनल क्राइम ब्यूरो स्टैटिक्स इंडिया 2020 इसमें बताया जाता है कि 488500 कैदी थे दिसंबर 2020 का डाटा है .
इसमें से 371848 मतलब 76.1 परसेंट कैदी अंडर ट्रायल में मतलब ऐसे लोग जिन को जेल में डाल दिया गया है लेकिन उनकी जो इन्वेस्टिगेशन है या फिर ट्रायल है वह पेंडिंग है competent अथॉरिटी के द्वारा .
लॉ कमीशन ने 277 भी नंबर की रिपोर्ट जिसका नाम था रॉन्ग फुल प्रॉसीक्यूशन मिसकैरिज आफ जस्टिस लीगल रेमेडीज 2018 लॉ कमीशन ने यह बात कही जितने भी अंडर ट्रायल केस चल रहे हैं उनमें से 25.1 परसेंट ऐसे हैं जिन्होंने 1 साल से ज्यादा समय जेल में बिता दिया है यह बात कही थी प्रिजन स्टैटिक्स इंडिया 2015 के आंकड़े से कभी-कभी ऐसी कंडीशन भी आ जाती है कि लोअर कोर्ट ने कैदी को सजा सुना दी बाद में जब हाईकोर्ट में वह जाता है तो वहां उसको छोड़ दिया जाता इसका मतलब उसको तो जेल में रखा गया हमने उसकी आजादी को खत्म करने की कोशिश की .
ऐसे लोग जिसमें सरकार की गलती है या फिर गलत लोगों के द्वारा उनको फंसा दिया गया ऐसी कंडीशन में इन कैदियों को कुछ कंपनसेशन मिलना चाहिए या नहीं?
कंपनसेशन को लेकर कि हमारे देश में किस प्रकार के कानून है
1 सेक्शन 358 सीआरपीसी 1973
इसमें कहा गया है ऐसी कंडीशन में कैदी को ₹100 का कंपनसेशन दिए जाने का प्रावधान है।
यह ₹100 की राशि भी उसी व्यक्ति से वसूली जाएगी जिस ने गलत कंप्लेन किया है जैसे कि एक एग्जांपल देखते हम केरला के एक वैज्ञानिक उनको भी कोर्ट ने कंपनसेशन देने का आदेश सुनाया था ।
2 प्रोटेक्शन ऑफ ह्यूमन राइट्स एक्ट 1993
इस एक्ट में प्रावधान किया गया है कि एनएचआरसी के पास पावर है वह आदेश दे सकता है इलीगल डिटेंशन रोंगफुल कनविक्शन इसके अलावा जिलों में प्रताड़ना होना ह्यूमन राइट्स का वायलेशन होना इंक्वायरी करेगा फिर कंपनसेशन के लिए भी आदेश जारी कर सकता है ।
3 इंटरनेशनल covenant ऑन सिविल एंड पॉलीटिकल राइट्स 1966
इसके आर्टिकल 14 के भाग 6 में कहा गया है कंपनसेशन फॉर रॉन्ग फुल कनविक्शन
4 आर्टिकल 5 का भाग है 5 यूरोपियन कन्वेंशन फॉर द प्रोटेक्शन ऑफ ह्यूमन राइट्स एंड फंडामेंटल फ्रीडम
का यहां पर भी कंपनसेशन का प्रावधान किया गया है गलत अरेस्ट करने पर
व्हाट इज द लीड फॉर राइट टू कंपनसेशन
1 पहली बात
1 पर्सन जिसको जेल में डाला जाता है वह एक्सप्लेन फिजिकल और मेंटल डिस्कंफर्ट फील करता है इससे उसके आर्टिकल 21 के अंतर्गत राइट टू डिग्निफाइड लाइफ का जो अधिकार है वह समाप्त हो जाता है ।
इसी के चलते चलते हमारा जुडिशल सिस्टम स्लो हो जाता है किसी व्यक्ति की गलत गिरफ्तारी उसके आर्टिकल 22 को भी वायलेट करती है जिसमें कहा गया है प्रोटक्शन अगेंस्ट आर्बिट्रेरी अरेस्ट्स एंड इलीगल डिटेंशन ।
2
जिस व्यक्ति को जेल में डाला जाता है वह डीप साइक्लोजिकल इंपैक्ट से होकर की गुजरता है एक स्टडी थी जिसको अंडरटेकन किया गया था यूनिवर्सिटी ऑफ क्लीवलैंड यूएस जिससे पता चलता है -
कि यदि हम किसी भी व्यक्ति को लंबे समय तक जेल में रखते हैं तो वह व्यक्ति की
💐फीलिंग खत्म होने लग जाती है
💐लॉस आफ आईडेंटिटी
💐फीलिंग लॉस
💐 फ्रीडम लॉस
💐लॉसऑफ डिग्निटी एंड फीलिंग ऑफ डिजीज एंड एनएक्सटी
💐डिसऑर्डर
💐डिप्रेशन
💐पैरानॉइआ ।
3 जितने समय तक वह जेल में रहता है तो वह अपने जितनी भी अपॉर्चुनिटी थी कमाई की लाइफ की सारी अपॉर्चुनिटी को खो देता है चाहे वह एजुकेशन से लेकर हो चाहे वह फ्यूचर कमाई की एबिलिटी हो
4 कैदी और उसके परिवार की समाज में इज्जत कम हो जाती है उनका सोशल बॉयकॉट होने लगता है उनका रेपुटेशन कम हो जाता है सोसाइटी में
5 राइट टू कंपनसेशन किसी भी कैदी के लिए बहुत बड़ा अधिकार होने वाला है इससे गलत तरीके कि जो आरोप लगते हैं वह कम हो जाएंगे एक एग्जांपल हम देख लेते हैं सेक्शन 66a इसको सुप्रीम कोर्ट ने खत्म कर दिया है इसके बाद भी कई बार पुलिस और सरकार के द्वारा सेक्शन 66a के अंतर्गत केस दर्ज किए जाते हैं और बहाना बताया जाता है कि हमें तो यह जानकारी है ही नहीं ।
सजेशन
💐पार्लियामेंट को कानून बनाना चाहिए लॉ कमीशन की 277 में रिपोर्ट को ध्यान में रखते हुए जिसमें यूनिफार्म कंपनसेटरी फ्रेमवर्क का प्रावधान होना चाहिए।
मतलब की कंडीशन क्या होंगी कितना अमाउंट का कंपटीशन दिया जाएगा प्रोसीजर किस प्रकार की रहेगी यह सारी बातें कानून में उल्लेखित होना चाहिए ।
💐हर जिले में एक स्पेशल कोर्ट क्रिएट किया जाना चाहिए ताकि हर प्रकार के क्लेम को देखा जा सके इसी से किसी भी केस के स्पीड को हम बढ़ा सकते हैं ।
💐कंपनसेशन हमें दोनों प्रकार का देना पड़ेगा पहला कितना वह शारीरिक क्षति को महसूस किया है दूसरा कितना वह मानसिक तनाव महसूस किया है दोनों प्रकार के कंपनसेशन देना जरूरी पहले वाले को प्रिकॉनरी और दूसरे वाले को नॉनपिकानरी कॉनरी कंपनसेशन कहते हैं
।
💐एनजीओ का पार्टिसिपेशन बीच में होना जरूरी है non-governmental ऑर्गेनाइजेशन शॉर्टकट में एनजीओ इनका रोल भी महत्वपूर्ण हो जाता है किसी भी निर्दोष व्यक्ति को कंपनसेशन दिलाने में
💐किसी कंडीशन मेरी कैदी की मृत्यु हो जाती है तो उसके कंपनसेशन का फायदा उसके परिवार वालों को मिलना चाहिए।
💐ला इंफोर्समेंट अधिकारियों को ट्रेनिंग देना भी जरूरी है ताकि वह आंख मूंदकर गिरफ्तारी ना करें ।
💐क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम को रिफॉर्म करना जरूरी है पेंडेंसी केस इसको कम करना पड़ेगा इसके अलावा अंडरटेक करना पड़ेगा जुडिशल रिफॉर्म को ।
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