498 a का मिसयूज

498 a का मिसयूज

यदि पति या फिर उसके परिवार के द्वारा पत्नी से दहेज की डिमांड की जाती है और उसको प्रताड़ित किया जाता है इस मामले में 498 ए धारा लगाई जाती है और इसके अंतर्गत केस दर्ज किया जाता है .

इसके दुरुपयोग को रोकने के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कुछ गाइडलाइन जारी किए थे . जिसके अंतर्गत में यदि कोई महिला दहेज प्रताड़ना का केस पुलिस स्टेशन में दर्ज करती है . एफ आई आर दर्ज करा दी है तो पति या फिर उसके परिवार की गिरफ्तारी तुरंत नहीं होगी.

 इसके लिए 2 महीने का टाइम रहेगा .
2 महीने के लिए जो केस है वह फैमिली वेलफेयर कमेटी के पास भेजा जाएगा .

यह कमेटी पति और पत्नी के बीच में कंप्रोमाइज करवाने का काम करेगी .और इसी दौरान पुलिस के पास समय रहेगा कि वह अच्छी तरह से जांच कर सकती है.गवाहों के बयान दर्ज कर सकती है खुद की तरफ से सुबूत इकट्ठा कर सकती है.

सोशल एक्शन फोरम फॉर मानव अधिकार वर्सेस
यूनियन ऑफ इंडिया 2018 इस केस में सुप्रीम कोर्ट ने कुछ इसी प्रकार का निर्णय दिया था.

इसमें सुप्रीम कोर्ट ने वेलफेयर कमिटी को 1 महीने का टाइम दिया था वही इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2 महीने का टाइम दिया था.

कोई जवान मेडिएटर और एडवोकेट है सीनियर लॉ स्टूडेंट को शामिल किया जाए ऐसा अल्लाहाबाद हाई कोर्ट का कहना था.

राजेश शर्मा केस और सुप्रीम कोर्ट का ऑर्डर - 
यदि वाइफ की बॉडी में कहीं पर चोट के निशान हैं तो जो 1 महीने का टाइम पीरियड निर्धारित किया गया है यह इस कंडीशन में लागू नहीं होगा. 
केस फैमिली वेलफेयर कमेटी के पास 1 महीने के लिए जरूर जाएगा लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि पुलिस के पास पावर नहीं है उस व्यक्ति को गिरफ्तार करने की।

वही इलाहाबाद हाईकोर्ट की बात करें धारा 307 , 10 साल सजा वाले केस में भी यह नियम कानून लागू होने वाला है । इलाहाबाद हाई कोर्ट का कहना था कि जब तक केस फैमिली वेलफेयर कमेटी के पास रहेगा पुलिस आरोपी को गिरफ्तार नहीं कर सकती है ।

विशाखा वर्सेस राजस्थान सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन 1997 इस टाइम में जो गाइडलाइन सुप्रीम कोर्ट के द्वारा दी गई थी उस समय कोई नियम कानून नहीं था वर्कप्लेस पर यदि महिला का  हरासमेंट होता है । 

आरनेस कुमार वर्सेस स्टेट ऑफ बिहार 2004 सुप्रीम कोर्ट का जजमेंट 
जब तक पुलिस ऑफिसर को जरूरी ना लगे तब तक व्यक्ति की गिरफ्तारी नहीं होना चाहिए ।

 इसके अलावा पुलिस ऑफिसर की ट्रेनिंग होना चाहिए । 

यदि पुलिस ऑफिसर निर्दोष व्यक्ति को गिरफ्तार करता है तो उसको डिपार्टमेंटल सजा देनी चाहिए ताकि उस डिपार्टमेंट में दूसरे लोग सीख ले सके ।

इसके अलावा सरकार चाहे तो 498a को जमानती अपराध बना सकती है अभी यह गैर जमानती अपराध के अंतर्गत आता है ।

या फिर इसको कंपाउंडेबल ऑफेंस मैं भी शामिल किया जा सकता है जिसके अंतर्गत पति और पत्नी बिना कोर्ट के भी आपस में कंप्रोमाइज कर सकते हैं ।

मेडिएशन बिल 2021 यदि यह बिल आ जाता है तो इस प्रकार के किसी को हम सॉल्व कर सिविल रास्ते के माध्यम से भी इस प्रकार के केस को हम निपटा सकते हैं ।
तो जब तक कोई कानून संसद बना नहीं देती है इस प्रकार से हाई कोर्ट को अपने जूरिडिक्शन से बाहर आकर आर्डर देना ठीक नहीं है क्योंकि बाद में हो सकता है इसको सुप्रीम कोर्ट स्ट्रक डाउन कर दें।




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