हब एयरपोर्ट
हब एयरपोर्ट
यदि हम किसी रेलवे स्टेशन की बात करें ऐसा रेलवे स्टेशन जो कि जंक्शन है इस जंक्शन से कई सारी दिशाओं में ट्रेन आती और जाती हैं । यह जंक्शन ही हब का काम करते हैं।
इसी हब वाली सोच का उपयोग किया जाता है कनेक्टिविटी को बढ़ाने के लिए । यही उदाहरण जिस प्रकार से हमने रेलवे का लिया है वही उदाहरण हम एयरपोर्ट का ले सकते हैं ।
उदाहरण हम लेते हैं दिल्ली एयरपोर्ट का दिल्ली एयरपोर्ट चार बड़े बड़े शहरों से मान लीजिए कनेक्टेड है. ठीक इसी प्रकार से मुंबई एयरपोर्ट आसपास की सिटी से वेल कनेक्टेड है . तो दिल्ली और मुंबई को हम हब बोलेंगे.
मान लीजिए किसी को रायपुर जाना है तो सबसे पहले वह जयपुर से दिल्ली जाएगा दिल्ली से रायपुर के लिए फ्लाइट पकड़ेगा. इसमें लोगों को परेशान होना पड़ता है क्योंकि जिस एरिया में वह रह रहे हैं वहां से डायरेक्ट फ्लाइट नहीं रहती है डायरेक्ट लाइट नहीं होने का एक रीजन यह भी है कि उस एयरपोर्ट में ज्यादा कैपेसिटी नहीं रहती है हवाई जहाज को खड़े करने की. और फिर बोझ बढ़ जाता है दिल्ली और मुंबई जैसे केंद्रीय एयरपोर्ट पर और हवाई जहाज शहर में तो टाइम पर एंटर कर जाती है लेकिन पायलट एयरपोर्ट पर हवाई जहाज को खड़ी नहीं कर पाता है जगह कम होने के चलते.
हब एयरपोर्ट ऐसे एयरपोर्ट होते हैं जिसका उपयोग किया जाता है एयरलाइंस के द्वारा यात्रियों को इकट्ठा करने के लिए फिर यात्रियों को यहां से दूसरी जगह हवाई जहाज से भेजा जाता है. इससे कंपनी को फायदा यह होता है कि उसकी टिकट ज्यादा से ज्यादा बिकती है , और आप की लंबाई भी बढ़ जाती है और यदि आपकी यात्रा की लंबाई बढ़ती है तो आप का किराया भी फिर बढ़ जाएगा.
शुरु शुरु में ओरिजन और डेस्टिनेशन का कांसेप्ट हुआ करता था जैसे दिल्ली से जाना है आपको तो सीधे मुंबई जाओगे मुंबई से कहीं और चेंज करने के लिए उतनी ज्यादा विकल्प आपके पास नहीं होते थे.
इसीलिए दिल्ली जैसे शहरों में फ्लाइट लैंड करने वाली जगह अलग रहती थी और टेक ऑफ करने की जगह अलग होती थी. अब आज के समय में एक ही जगह में सारी सुविधाएं हो गई है लैंडिंग की भी और टेकऑफ की भी .
आज के समय में बहुत सारे इंटरनेशनल एयरपोर्ट एयरपोर्ट हब के रूप में विकसित हो चुके हैं.
As London - कई सारी फ्लाइट्स यात्रियों को यहां पर लाकर के इकट्ठा करती हैं फिर लोगों को जहां भी जाना रहता है उनको लंडन से भेजा जाता है.
Scopes
1 हमारे देश में भी चीज लागू हो सकती है इसकी बहुत सारी संभावना है क्योंकि हमारे देश का एविएशन सेक्टर बहुत तेजी के साथ में ग्रो कर रहा है. एयर के माध्यम से यात्रा करना काफी सस्ती पड़ती है और टाइम भी इसमें कम लगता है ।
2. विश्व के कई सारे हिस्सों में भारत के लोग रहते हैं उनका आना-जाना लगा ही रहता है यह संख्या लगभग 80 मिलियन के बराबर है
3 एविएशन के मामले में भारत तीसरे नंबर पर आता है चीन और अमेरिका के बाद इसके अलावा भारत की गुणों में भी तेजी के साथ में ग्रो कर रही है।
बाधा
1 एयर अथॉरिटी ऑफ इंडिया के द्वारा हवाई जहाज वाली कंपनियों को बोला जाता है कि आप इस लैंड का उपयोग दूसरी अदर एरो एक्टिविटी के लिए नहीं कर सकते हैं।
2 हमारे देश में अलग-अलग कंपनियों के बीच में कंपटीशन चल रहा है किराया बहुत कम ले रही हैं लेकिन उनको लागत ज्यादा लग रही है। एविएशन टर्बाइन फ्यूल काफी महंगा पड़ जाता है कंपनियों को सरकार इस फ्यूल को जीएसटी के अंडर में ला सकती है इससे इस फ्यूल की कीमत काफी कम हो जाएगी यदि सरकार कंपनियों को इंसेंटिव दे सकती है ।
3 34 एयरपोर्ट काम में आ रहे हैं। लेकिन जो छोटे-मोटे एयरपोर्ट होते हैं वहां पर लोगों की आवाजाही बहुत कम होती है।
Opportunity
एयरपोर्ट को यातायात के अन्य साधनों के साथ भी कनेक्ट किया जाना चाहिए as rail , road . मतलब कि रेलवे स्टेशन या फिर बस स्टैंड की डिस्टेंस एयरपोर्ट से ज्यादा नहीं होनी चाहिए.
जो एस्पायरिंग अब एयरपोर्ट है वह टियर 2 और टियर 3 के साथ में पार्टनरशिप कर सकते हैं ताकि उनका जो कैचमेंट है वह ज्यादा हो सके.
एयरपोर्ट अपने रेवेन्यू को और भी ज्यादा जनरेट कर सकते हैं इसके लिए उन्हें कार्गो की हैंडलिंग भी करना होगा एमआरओ मतलब कि मेंटेनेंस के काम करके इसके अलावा एफबीओ मतलब की हवाई जहाज में ड्यूल भरने का ठेका किसी अदर कंपनी को दिया जा सकता है.
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