फोरेंसिक साइंस क्या है ? और जस्टिस सिस्टम में कैसे मदद करता है ? भारत में इससे सम्बंधित क्या क्या सुझाव हैं ?

भारत के क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम में किस प्रकार से सुधार किया जा सकता है ?  फॉरेंसिक साइंस इसमें कितना अहम रोल अदा करता है  ?

सबसे पहले क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम को समझते 
हमारा जो क्रिमिनल justice सिस्टम होता है जिसके 3 पिलर होते हैं -

💐एक होता है जुडिशरी 
💐दूसरा होता है जेल 
💐और तीसरा होता है पुलिस .

इसको इंप्रूव कैसे करके करें ?? क्योंकि सबसे बड़ी प्रॉब्लम आती है इन्वेस्टिगेशन के लेवल पर क्योंकि इन्वेस्टिगेशन पुलिस करती है .
वहां पर यह साबित करना सबसे ज्यादा मुश्किल हो जाता है कि कौन इनोसेंट और कौन अपराधी है .

यहीं पर सबसे इंपोर्टेंट हो जाता है रोल फॉरेंसिक साइंस का क्योंकि यदि फॉरेंसिक जांच करते हैं तो हमें गवाह के ऊपर ज्यादा निर्भर होना नहीं पड़ता है .

वकील हो या जज उनके लिए  जो भी हायर ग्रेविटी वाले होते हैं इन को सॉल्व करने में फॉरेंसिक साइंस हेल्प कर सकती है ।

 फॉरेंसिक साइंस को डिफाइन 
करने के लिए कैथरीन रांसलन , एक राइटर है उनकी बुक है -  बीटिंग द डेविल गेम हिस्ट्री ऑफ फॉरेंसिक साइंस एंड क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन .

 इस बुक में उन्होंने बताया है फॉरेंसिक साइंस के बारे में .

इसमें साइंटिफिक पर्सपेक्टिव की एक एप्लीकेशन है , जिसमें आप लीगल प्रोसेस को सॉल्व करने के लिए , आप टेक्निक यूज करते हो इन्वेस्टिगेशन करते हो ,और जो कोर्टरूम के प्रोटोकॉल होते हैं उनको फॉलो करते हो और साइन का यूज करते हो .

इसमें हम साइंटिफिक डाटा का यूज करते हैं अपने प्रोसेस में जिससे हमारा लीगल सिस्टम बहुत एफिशिएंट तरीके से काम करने लगता है 

इन्वेस्टिगेशन 

का मतलब होता है जो भी हाइपोथेसिस है मतलब की ,अंदाजा ऐसा हुआ होगा ।

हाइपोथेसिस को डिस्कार्ड करने के लिए इसी के लिए फॉरेंसिक साइंस हेल्प करता है इसमें कई विधि यूज़ करते हैं
 जैसे कि ऑटोप प्रोसीजर फिंगर प्रिंटिंग टेस्टिंग और मैचिंग करना पाइजन का ब्लड स्पैटर एनालिसिस मैचिंग गंज से लेकर के बुलेट फायर मतलब बैलेस्टिक इसके अलावा वॉयस सैंपल का मैच कराना हेड राइटिंग का एससमेंट लेना इसके अलावा डीएनए एनालाइज करना यह सारी चीजें किस के अंडर में काम करती हैं
यह फॉरेंसिक साइंस का आईडिया टेलीविजन के अलग-अलग शो में मिला है वर्चुअल क्राइम या फिर फिल्मी दुनिया यहां पर क्रिमिनल को पकड़ने में जोड़ नहीं आता लेकिन रियल लाइफ में थोड़ा मुश्किल होता है इस टाइप की प्रॉब्लम को को शॉट आउट करने में हमारे देश में सबसे बड़ी समस्या क्या है कितने लोगों पर कितनी पुलिस है कितने लोगों पर कितने चार्जेस जेल में कितनी जगह है और जेल में कितने इनमेट्स है मतलब कितने कैदी हैं यह सारा  हमारे यहां बिगड़ा हुआ दूसरी बात यह है हमारे देश में फॉरेंसिक साइंस की लेबोरेटरी बहुत कम संख्या में है सेंट्रल फॉरेंसिक लैबोरेट्री की बात करें तो हमारी इंडिया में केवल 7 ही हैं हैदराबाद कोलकाता चंडीगढ़ न्यू दिल्ली गुवाहाटी भोपाल और पुणे में इसमें से दिल्ली वाली ब्रांच सीबीआई के अंडर में काम करती है

बाकी जो ब्रांच है हो अंडर कंट्रोल में है डायरेक्टरेट आफ फॉरेंसिक साइंस सर्विस यह हाई क्वालिटी इन्वेस्टिगेशन में मदद करती है इसका यूज करते हैं इसके अलावा 1 नेशनल फॉरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी को एस्टेब्लिश किया गया है गांधीनगर गुजरात में 2020 में अब फिर जो एक्जिस्टिंग नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ क्रिमिनोलॉजी एंड फॉरेंसिक साइंस था दिल्ली में इसको इंटीग्रेट कर दिया गया है इस नई यूनिवर्सिटी में हमारे यहां पर 32 स्टेट फॉरेंसिक लैब है मतलब स्थिर और 529 मोबाइल फॉरेंसिक यूनिट है जिसमें जो दिल्ली है वह स्टेट फॉरेंसिक लैब की कैटगरी में आता है और 6 मोबाइल यूनिट के अंडर में आती Iske alava Kai sari private forensic laboratory bhi hain Hamare Desh Mein और उनकी क्वालिटी और स्टैंडर्ड ऑफ इंटीग्रिटी अलग-अलग जगह में अलग-अलग हैं

यदि हमारे पास में लेबोरेटरी काम है तो इस पुलिस को रिपोर्ट देरी से मिलती है ठीक है इसके अलावा हम क्वालिटी वाली जांच नहीं कर पाते हैं प्रोसीजर में इतने ज्यादा देर हो जाती है कि इतने में तो गवाह से गवाही लेकर के किस को शॉट आउट किया जा सकता है यह केवल लेबोरेटरी के कम होने से हो रहा है

1985 में डीएनए टेस्ट डिस्कवर हो चुका था इंडिविजुअल को आईडेंटिफाई करने के लिए 2017 में द हिंदू में एक रिपोर्ट पब्लिश हुई थी जिसमें यूके में क्राइम के हर साल 60,000 डीएनए टेस्टिंग होती है हमारे यहां 7530 की टेस्टिंग हुई है अभी तक लैब में बहुत सारे केसेस पेंडिंग हमारे यहां ऐसी नहीं है फंक्शनिंग भी नहीं है
इसके अलावा हमारे यहां पर फॉरेंसिक के लिए क्वालिफाइड पर्सनल की भी कमी है स्टाफ की कमी है सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में अपना रिजर्वेशन दिया था उसका नाम है इस स्पीडी ट्रायल ऑफ अंडर ट्रायल प्रिजनर्स 2018 सुप्रीम कोर्ट ने कहा था स्टेट ऑफ द सेंट्रल फॉरेंसिक साइंस लैबोरेट्री स्टेट लेवल की और सेंट्रल लेवल की फॉरेंसिक लेबोरेटरी हमारे देश में बहुत कम है सेंट्रल वाली की बात करें तो 97 साइंटिफिक ऑफिसर की पोस्ट खाली है और जो 67 है वह एडमिनिस्ट्रेटिव ऑफिसर की कमी है स्टेट लेवल पर 50 परसेंट वैकेंसी खाली है हमारे देश में फिंगर प्रिंटिंग मैचिंग की व्यवस्था की शुरुआत 1896 में एडवर्ड हेनरी के द्वारा की गई पुलिस में स्किल और ट्ड डिटेक्टिव कैडर तैयार करने की जरूरत है ताकि रेप जैसे केस को चालू कर सकें प्रॉपर फैसिलिटी चाहिए ट्रेनिंग की इसके अलावा स्टैंडर्ड होने चाहिए हाई लेवल के एजुकेशन प्रोग्राम चलाया जाए

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