डिस्कॉम कम्पनी और उनकी समस्याओं का हल
डिस्कॉम कंपनियों को केवल फाइनेंशयल
सपोर्ट देकर के उनमें सुधार नहीं कर सकते ।पिछले सप्ताह यूनियन पावर मिनिस्ट्री ने प्रपोज किया था एक न्यू स्कीम ताकि हेल्प किया जा सके केस स्ट्रैप पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी डिस्कॉम को ।
2020 में फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण ने अनाउंस किया था 90 हजार करोड़ लिक्विडिटी इन्फ्यूजन स्कीम ।
इससे 1.2 लाख करोड़ की सब्सिडी वृद्धि हुई थी ताकि डिस्कॉम कंपनी सेटलमेंट कर सके उनके कर्जा को
इस प्रकार की स्कीम सरकार पहले भी घोषित कर चुकी है मगर इससे कोई खास सुधार नहीं होने वाला है ।
लेकिन कंपनियों की असली प्रॉब्लम
है उनके स्ट्रक्चरल मुद्दा को लेकर के।
बेसिक इशू को आप केवल सपोर्ट दे कर के नहीं सॉल्व कर सकते जब तक कि आप उनमें इंटरनल सुधारना लेकर आएं ।
कर्ज
अभी फिलहाल देखा जाए तो डिस्कॉम कंपनियों के ऊपर करेंटली ऐस्टीमेटेड ड्यू है एक लाख करोड़ रुपए है ।
स्टेट राजस्थान ,उत्तर प्रदेश ,महाराष्ट्र ,आंध्र प्रदेश तेलंगाना और तमिलनाडु इनका काफी बड़ा हिस्सा है इसमें ।
इस नई स्कीम के अंतर्गत में
मंत्रालय की अधिसूचना में कहा गया है कि प्रस्तावित योजना डिस्कॉम को अपना बकाया चुकाने में सक्षम बनाएगी और वे 48 किस्तों में इसका भुगतान कर सकेंगी।
इसमें वितरण कंपनियों के लिए एक बारगी राहत का भी प्रस्ताव किया गया है, जिसके तहत मूल राशि और देर से भुगतान का अधिभार (एलपीएससी) को अधिसूचना के दिन तक स्थिर की जाएगी और आगे एलपीएससी नहीं लगाया जाएगा।
डिस्कॉम पर एलपीएससी तब लगाया जाता है, जब वे अपना मासिक भुगतान दिए गए 90 दिन में करने में सक्षम नहीं होती हैं।
इससे सबसे ज्यादा फायदा महाराष्ट्र और तमिलनाडु जैसे राज्यों को होने वाला है क्योंकि ऑलरेडी इनकी जो पेमेंट है वह 4 से 6 महीना लेट ही रहती है ।
कौन-कौन सी प्रमुख ऐसी समस्याएं हैं तो उनमें से पहली समस्या है
🍅 रेगुलर टैरिफ रिवीजन - पर यूनिट के हिसाब से चार्ज लिया जाता है उसमें रिवीजन जरूरी
🍅राज्य सरकार टइम में सब्सिडी को नहीं रिलीज करती हैं ।
🍅पर यूनिट जो चार्ज लिया जाता है उसको इन्फ्लेशन के हिसाब से बदलते रहना चाहिए
🍅एग्रीगेट कमर्शियल एंड टेक्निकल लॉसेस को भी कम करना जरूरी होगा ।
🍅 इसके अलावा बिजली की चोरी को भी रोकना जरूरी है ।
🍅इन एफिशिएंट बिलिंग इसी के चलते चलते डिस्कॉम कंपनियों को बिजली खरीदना महंगा पड़ रहा है और उसे डिसटीब्यूशन करना और भी महंगा पड़ता है ।
Source indian express
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