चीन और भारत के बदलते रिश्ते ?
चीन और भारत के बदलते रिश्ते ?
1971 में यह हांगकांग में फोरेन सर्विस में थे और ये चीनी भाषा सीख रहे थे । इसके बाद इनकी पोस्टिंग चाइना में भी रही थी 6 साल के लिए यह एक ऐसी जगह में थे जिसका फिलोसॉफिकल और कल्चरल हेरिटेज बहुत रिच था उस टाइम में चाइना दुनिया को किस नजर से देखता था यह सारी बातें लेखक अपनी आंखों से देख रहे हैं आज के समय में चाइना विश्व की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है अमेरिका के बाद में और यह लीडर बन गया है न्यू एज टेक्नोलॉजी जैसे कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस क्वांटम कंप्यूटिंग स्पेस एक्सप्लोरेशन के मामले में
1978 में देखा जाए तो दोनों देश एक भी इकोनामिक लेवल पर थे दोनों की सेम जीडीपी थी और सेम पर कैपिटा इनकम थी ।
इसके बाद साइना ने अपने आप को बहुत तेजी के साथ में एक्सपेंड करना चालू कर दिया और हम उतनी तेजी से एक्सपेंड नहीं कर पाए ।
1988 में राजीव गांधी बीजिंग जाते हैं और वहां के लीडर डंग जाओ पिंग से मिलते हैं । इस समय में भी इंडिया और चाइना में ज्यादा वक्त नहीं था थोड़ा चाइना इंडिया से आगे बढ़ चुका था लेकिन बहुत ज्यादा अंतर नहीं था उस समय चाइना के लीडर ने कहा था एशियन सेंचुरी इंडिया चाइना के बिना आगे नहीं बढ़ सकती उस समय भी चाइना इंडिया को इंपोर्टेंस देता था
लेकिन हमारे यहां पर लिबरलाइजेशन और इकोनामिक रिफॉर्म्स लेट हुए उसके बाद भी इकोनॉमिकल तेजी से ग्रो नहीं कर पाए क्योंकि हम एक डेमोक्रेसी थे । किसी प्रोजेक्ट के अभ्यास में आगे चलता आवाज उठा सकती है लेकिन वही चाइना में ऐसा नहीं था वही चाइना चाइना में यदि कोई प्रोजेक्ट अप्रूवल हो जाता है तो ग्राउंड लेवल पर पूरा खत्म हो जाता है इस प्रकार से धीरे-धीरे करके इंडिया और चाइना के बीच का गैप बढ़ता ही गया ।
2003 से 2007 के बीच में ऐसा लग रहा था कि हो सकता है इंडिया और चाइना के बीच में जगह है उसको इंडिया पूरा कर ले ।
यहां पर बेस रेट को हमें समझना होगा
मान लो पहले चाइना 100 पर था चाइना 110 हो गया और इंडिया 105 अब चाइना 120 हुआ इंडिया 110 हुआ अब भले ही हमारी ग्रोथ रेट चाइना के बराबर है लेकिन साइना हमसे आगे ही रहेगा और 2007 से लेकर 2015 के बीच में भी चाइना की ग्रोथ इंडिया के रिस्पेक्ट में ज्यादा ही रहे
वहीं 2015 के बाद इंडिया की ग्रोथ रेट थोड़ी बहुत स्लो डाउन हुई लेकिन चाइना की बढ़ती गई
भले ही अभी चाइना की ग्रोथ थोड़ी धीमी हो गई है लेकिन उसकी बेस रेट हमसे बहुत ज्यादा बढ़ा है और इंडिया का देश रेट उतना ज्यादा बड़ा नहीं है ।
भले ही इंडिया फास्ट ग्रोथ दिखा ले लेकिन हमारा देश रेट कम ही है चाइना अपने आप को कहता है कि हमारी इंडिया से 5 गुना है मतलब इंडिया को हमेशा नीचे के लेवल पर हूं समझता है
2003 में इंडिया के प्राइम मिनिस्टर अटल बिहारी चाइना की यात्रा पर गए थे उस समय में 2 सब्जेक्ट पर बातचीत हुई थी पहला था बॉर्डर लड़ाई को लेकर के सलूशन ढूंढना और जो दोनों रिप्रेजेंटेटिव रहेंगे दोनों देशों के उस समय समय पर मिलते रहेंगे उस टाइम में चाइना ने यह भी कहा था कि हम सिक्किम को इंडियन स्टेट रिकॉग्नाइज करते हैं क्योंकि वह 2003 से पहले सिक्किम को अपने मैप में दिखाता था 1975 से पहले वह सिक्किम को इंडिया का पाठ नहीं मानते थे सिक्किम के नाथूला पास से चाइना सटा हुआ इसी उद्देश्य से एलएसी पर भी वह घुसे थे लेकिन वह कामयाब नहीं हो पाए हालांकि अभी तक बंद नहीं हुई है लेकिन चाइना की जो एक्शन है वह एंटी इंडिया हैं ।
Chinese premier wen jiabao अप्रैल 2005 में भारत आए थे और उस समय लेखक असिस्टेंट फॉरेन सेक्रेट्री उनके साथ में क्लोज अली एसोसिएटेड था उस विजिट में
चाइना यह भी जानता था कि इंडिया नेगोशिएट कर रहा है एक सिविल न्यूक्लियर कॉरपोरेशन एग्रीमेंट अमेरिका के साथ में जिससे इंडिया की जो डिप्लोमेटिक प्रोफाइल है वह बहुत बड़े मात्रा में इनहेल्स हो जाएगी और इससे इंडिया और यूएस की पार्टनरशिप और भी मजबूत हो जाएगी इसी के चलते चलते इसी बात ने साइना को इनकरेज किया कि वह बैलेंस करें इस डेवलपमेंट को कैसे करें ?
अपने खुद के रिलेशन को अपग्रेड करना पड़ेगा उसको इंडिया के साथ और ठीक इसी प्रकार से इंडिया भी चाइना के प्रति करेगा .
उस टाइम में मनमोहन सिंह और जियाबाओ के बीच में बातचीत हुई उससे यह बात निकलकर आई चाइना इंडिया के लिए खतरा नहीं है और ना ही इंडिया चाइना के लिए खतरा है .
दूसरी बात पूरे एशिया में और पूरे विश्व में इतनी बड़ी जगह है कि दोनों देश आसानी से अपनी ग्रोथ कर सकते हैं .
जी ने किस प्रकार हमें साइड में कर दिया एग्जांपल देखते हैं चाइना पाकिस्तान इकोनामिक कॉरिडोर को पाकिस्तान ऑक्यूपाइड कश्मीर से होकर के वह गुजार रहा है दूसरी बात खुलेआम डेजिग्नेटिड टैररिस ऐसे आतंकवादियों को यूनाइटेड नेशंस की टेंशन से उसने बचाया चाइना ऐसा इसलिए करता है क्योंकि ऐसा ना हो कि इंडिया बहुत ज्यादा वेस्ट की तरफ चला जाए क्योंकि इंडिया यूएस की तरफ दोस्ती बढ़ाते जा रहा है इसीलिए यह लोंग टर्म में चाहए खतरा है इसलिए चाइना ने इंडिया के खिलाफ एंटी इंडिया पॉलिसी को चालू कर दिया ।
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