रसिया ने अपने आप को एक किया है फिर भी नाटो उसकी एकता के लिये खतरा है ।

प्रथम वर्ल्ड वार के दौरान ब्रिटेन-फ़्रांस-रूस के समूह ने जर्मनी के एकीकरण को जन्म दिया ठीक उसी प्रकार रसिया ने भी अपने आप को एक किया फिर भी नाटो उसकी एकता के लिये खतरा है ।

Herr von tschirschy जो कि एक डिप्लोमेट और पॉलिटिशियन से इंपीरियल जर्मनी में उन्होंने कहा था नए साल के दिन 1996 हमवर्ग में जर्मनी की पॉलिसी ऐसी है यदि कोई भी एलाइंस ऐसा है जो कि डैमेज कर रहा है जर्मनी के इंटरेस्ट और प्रेस्टीज को तो जर्मनी इसका बदला लेगा उनका कहना था खासकर के ब्रिटेन और फ्रांस को उस टाइम फ्रैंको ब्रिटिश अलायन्स बन रहा था । इसी खिलाफ में यह बातें बोले गई जर्मनी कोई एक ग्रुप ऐसा लगता था कि वह हमारे देश के खिलाफ है वहीं ब्रिटेन और फ्रांस को जर्मनी की बढ़ती ताकत अपने लिए खतरा लगती है इसके बाद यूरोप की सिक्योरिटी स्वतंत्र बदलती है 1945 के बीच में रशिया और जापान का वार होता है ।
इसमें रसिया हार गया रसिया का इंट्रेंस कम होता गया और जर्मनी धीरे-धीरे करके बढ़ने लगा था इसके बाद फ्रांस का रसिया के साथ में एग्रीमेंट होता है और एक एग्रीमेंट होता है फ्रांस का इंग्लैंड के साथ 3 पावर यहां पर बन कर आई थी फ्रांस इंग्लैंड रशिया इन तीनों को मिलाकर के बोला जाता था ट्रिपल एंटिटी और इनके सबके अगेंस्ट खड़ा था जर्मनी जर्मनी के साथ में थे ऑस्ट्रिया और हंगरी और इटली यह सब जो हुआ और आज की जो कंडीशन दोनों में कोई खास अंतर नहीं 

1862 में otto von Bismark प्रेसिडेंट बने थे प्रसिया के । उस टाइम में जर्मन स्टेट यूनिफाइड नहीं था और प्रसिया लूज़ पार्ट  हुआ करता था इनएफेक्टिव जर्मन कंफेडरेशन का ।
 इसके बाद बिस्मार्क ने एग्रेसिव फॉरेन पॉलिसी को अपनाया ठीक है इसके बाद चार युद्ध लड़े जिसमें से तीन जीते डेनमार्क ऑस्ट्रिया और फ्रांस इसके बाद उन्होंने कनफेडरेशन को डिस्ट्रॉय कर दिया और एस्टेब्लिशमेंट स्ट्रांग और बड़ा jerman reich को  जिसने रिप्लेस किया प्रसिया को ।

इसके बाद फिर जर्मन रीच ही जर्मन नेशन बन गया थ ।
पिछले 20 साल में जर्मनी और यूरोप में शांतिपूर्ण माहौल क्योंकि बिस्मार्क ज्यादा युद्ध नहीं करना चाहता था क्योंकि बिस्मार्क सोचता तो सबसे पहले हमें जर्मनी को स्ट्रांग करना है यूरोप की जो पॉलीटिकल कंडीशन को समझता था बीसवीं शताब्दी में जर्मनी इतना पावरफुल हो चुका था कि जर्मनी से फ्रांस ब्रिटेन और रसिया परेशान होने लगे थे शुरुआत में जब विश्वास आया था तो कुछ टाइम में जर्मनी उस की लीडरशिप में कमजोर था ।

उसी प्रकार से जब 1991 में यूएसएसआर टूटा तो रसिया कमजोर था सन 2000 के लगभग में व्लादीमीर पुतिन रसिया के नेता बने उस समय र से भी उतना स्ट्रांग नहीं था रसिया की बहुत सारी सीमाएं टूट के अलग कंट्री बन चुकी थी रशिया की जो इकोनॉमी थी नीचे गिर रही थी उनकी करेंसी डीवैल्यू हो रही थी रसिया के लोगों का लिविंग स्टैंडर्ड भी नीचे गिर रहा था ब्यावर रसिया को फिर से बनाने की बात की गई जिस प्रकार से बिस्मार्क ने जर्मनी को फिर से बनाया था

हालांकि पुतिन ने रसिया का फिर से निर्माण किया है कई सारे इतिहासकार इस बात को मानने से इनकार करते हैं उनके रोल को लेकर के उनके देश में खुद कंट्रोवर्सीअल स्थिति है रसिया का एक बहुत बड़ा तबका है जो आंख बंद करके 3 को सपोर्ट करता है और एक बहुत बड़ा तबका ऐसा भी है जो रसिया के भीतर पुतिन का विरोध करता है धीरे-धीरे रसिया स्ट्रांग होते गया रसिया ने 2014 में क्रीमिया पर कब्जा कर लिया अब उसने यूक्रेन पर आक्रमण करके उस पर भी लगभग कब्जा कर लिया है अब यदि बैलेंस ऑफ पावर की रिस्पेक्ट में देखते हैं अब इतिहास में जाए तो जर्मनी को पहले फ्रांस ब्रिटेन और रशया का ग्रुप खतरनाक लगता था इसी प्रकार से अभी व्लादिमीर पुतिन के साथ में हो रहा है रसिया को ऐसा लगता है कि नाटो का जो पूर्व की तरफ में प्रसार हो रहा है वह रसिया के लिए खतरा है और यूरोपियन कंट्री को यह लगता है कि यदि हम ना तो मिल जाते हैं तो रसिया हमारे ऊपर अटैक कर सकता है अब हाल ही में यूरोप की एक दो और देश है जो नेटवर्क को ज्वाइन करना चाहते हैं इस प्रकार से देख रहे हैं कि जो सिचुएशन है वह किसी भी प्रकार से स्थिर होते नजर नहीं आ रही बिगड़ते ही जा रही है रसिया ने नैटो का जो एक्सपेंशन था हाल ही में जॉर्जिया में अपने सैनिक भेज करके उसको रोक दीया यूक्रेन ज्वाइन करना चाहता था तो यूक्रेन को भी उसने जॉइन करने से रोक दिया वहीं पर देखा जाए तो नेट भी पीछे नहीं हट रहा है

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