नैनो लिक्विड यूरिया

लिक्विड यूरिया
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के गांधीनगर में इफको कलोल इकाई में स्थापित विश्व के पहले नैनो यूरिया (तरल) संयंत्र का लोकार्पण किया गया।


इफको के मुताबिक लिक्विड यूरिया के इस्तेमाल से किसान सामान्य यूरिया की खपत को 50 फीसदी तक कम कर सकते हैं. 

असल में नैनो यूरिया लिक्विंड की एक 500 मिली वाली बोतल में 40,000 पीपीएम नाइट्रोजन होता है, जो सामान्य यूरिया के एक बैग के बराबर नाइट्रोजन पोषक तत्व प्रदान करता है.

इस संयंत्र के अतिरिक्त देश में 8 और नैनो यूरिया (तरल) संयंत्र लगाए जाएंगे। जिससे फर्टिलाइजर उत्पादन में हमारी स्थिति में सुधार होगा और हमारे किसानों को कम लागत में ही फर्टिलाइजर उपलब्ध हो सकेगा।

राठौर ने बताया कि 45 किलो की यूरिया की बोरी को आधे लीटर नैनो यूरिया से रिप्लेस किया जा रहा है। नैनो यूरिया को पानी में मिलाकर पौधों की पत्तियों पर छिड़काव किया जाता है। इसके उपयोग से पौधों में अपना भोजन बनाने की क्षमता में वृद्धि होती है, जिससे पौधों में अच्छी ग्रोथ आती है और उपज में भी वृद्धि होती है। इससे किसी भी प्रकार का प्रदूषण भी नहीं होता है।

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