भारत-पाकिस्तान रिलेशन

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शरीफ ने क्या गैंबल खेला है इस बीच एडिटोरियल में बताया गया है इंडिया और पाकिस्तान को अलग हुए 75 साल हो चुके हैं इस दौरान भारत और पाकिस्तान के रिलेशन में कई सारे चेंजर्स देखने को मिले हैं पाकिस्तान को एक मेजर स्टेट के रूप में देखा जाता है क्योंकि यह विश्व का पांचवी नंबर का सबसे बड़ा लार्जेस्ट पापुलेशन वाला कंट्री है जियो पोलिटिकल लोकेशन के हिसाब से महत्वपूर्ण है और यह लीडिंग रोल रखता है इस्लामिक वर्ल्ड में इसके अलावा पावरफुल आर्मी है विद न्यूक्लियर पावर वही हम पाकिस्तान की समस्याओं को देखें तो पाकिस्तान में अभी मैक्रो इकोनामिक क्राइसिस देखने को मिल रहा है इसीलिए पाकिस्तान इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड की तरफ रुख कर रहा है पुराना रिकॉर्ड देखा जाए तो अभी तक इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड में पाकिस्तान 22 बार जा चुका है सपोर्ट के लिए लेकिन फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स की ग्रिल इसमें पाकिस्तान अभी भी है और वहां से बाहर नहीं निकला है इसीलिए आईएमएफ से उसको कोई खास सहायता नहीं मिल पाती ऐसे में आएगा कोई रिस्क नहीं लेना चाहता फिर भी पाकिस्तान वहां जाता है मदद के लिए अभी पाकिस्तान में इकोनॉमिक कैसे चल रहा है ठीक उसी कंडीशन में पाकिस्तान की इकोनामी जाने वाली है जिस कंडीशन में श्रीलंका की इकोनॉमी जा चुकी है पाकिस्तान में मजबूरी में ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी करना पड़ जा रहा है इसलिए लोग नाराज सरकार से पाकिस्तान की आर्मी सरकार बनाने में तो मदद कर देती है लेकिन उसको पूरी तरीके से काम नहीं करने देती है अब ऐसे में क्या वहां की आर्मी एलाऊ कर देगी पाकिस्तान के नेता अपने हिसाब से काम कर सकते हैं पाकिस्तान के पूर्व से कमेंट को हमने तीन भागों में बांटा है पहला है डोमेस्टिक पॉलिटिकल आर्डर एक होता है इकोनामी और तीसरा है रीजनल और इंटरनेशनल रिलेशन इन तीनों को हैंडल करने में आर्मी इंटरफेयर करती है आर्मी चाहती है तभी वहां सरकार स्थिर हो पाती है डोमेस्टिक पॉलिटिक्स बात करें तो सरकार बनेगी या गिरेगी यह बात वहां की आर्मी डिसाइड करती है ठीक इसी प्रकार से इकोनॉमी को चलाने में और नेशनल और इंटरनेशनल रिलेशन को बनाने में  वहां की आर्मी का बहुत महत्वपूर्ण रोल होता है ।।
जैसे कि एग्जांपल के तौर पर देखें तो जिस आदमी ने इमरान ख़ान को प्रधानमंत्री बनाया था उसी आर्मी ने उनको प्राइम मिनिस्टर के पद से हटा दिया

अब भारत और पाकिस्तान की रिलेशन कैसे रहने वाले हैं यह तो आने वाले समय में ही पता चले क्योंकि जो बात इमरान खान ने लास्ट लास्ट में कही थी कि भारत और पाकिस्तान की रिलेशन जम्मू कश्मीर के मुद्दे पर डिपेंड करते हैं भारत को जम्मू कश्मीर का पुराना स्टेटस वापस करना पड़ेगा तब भारत के साथ में पाकिस्तान अपने रिलेशन को बनाएं और ठीक यही बात नए प्राइम मिनिस्टर ने भी चुनाव जीतने के बाद कहा था

1990 में पाकिस्तान ने ईरान से यूएसएसआर को भगाने में बहुत इंपॉर्टेंट रोल अदा किया था मुजाहिद्दीन को प्रमोट किया यूएस को सपोर्ट किया उस समय में भारत इतना मजबूत नहीं था भारत में गठबंधन की सरकार हुआ करती थी इसलिए इंटरनेशनल लेवल पर कोई कदम उठाना थोड़ा कठिन था 

30 साल बीत चुके हैं आज इंडिया के परिपेक्ष में स्थितियां बदल चुकी हैं। 1990 से आज तक देखा जाए तो ज्यादातर चीजें इंडिया के फेवर में हो और उसका लाभ आज की सरकार को मिला है आज देखा जाए तो गठबंधन की सरकार भी नहीं है बड़े-बड़े डिसीजन सरकार आसानी से ले सकती है  बायलैटरल रिलेशनशिप मे दोनों एक साथ खड़े होते हैं तो भारत का पलड़ा हमेशा भारी रहता है कोल्ड वार के बाद में जब हम आजाद हुए उस समय में कश्मीर का मुद्दा बहुत ज्यादा परेशान करता था पाकिस्तान इस को लेकर के इंटरनेशनल मंच पर मानवाधिकार के मुद्दों को उठाते रहता था और अमेरिका उसकी सहायता भी करता था पाकिस्तान हमेशा से जम्मू कश्मीर के स्टेटस को उठाते रहता है 3 पॉइंट के माध्यम से ही काम करता है 
💐Violent destabilisation of kashmir while rising human rights concern in global forum
💐कश्मीर क्वेश्चन को री ओपन करना जिसको इंडिया ने बिलीव किया था कि 1971 के युद्ध के बाद वह सेटल हो गया था इसके अलावा ग्लोबल 💐न्यूक्लियर कंसर्न को लिवरेज करना ताकि इंडियन जो कंसेशंस है कश्मीर के ऊपर पर उसको फोर्स किया जा सके

पाकिस्तान हमेशा यह कहता था कि कश्मीर में जो हुमन राइट्स वायलेशन हो रहा है उसको इंडिया सुधार करें तब हम इंडिया से बातचीत करेंगे

उस समय 3 लोग भाग लेते थे बातचीत पाकिस्तान के लीडर भारत के लीडर और पाकिस्तान की हुर्रियत लीडर जो कि हमेशा कश्मीर को अलग करना चाहते थे और पाकिस्तान आम कंट्रोल के माध्यम से भारत की मिलिट्री मॉर्डनाइजेशन को कम करना चाहता था आज के समय में कश्मीर मुद्दे को लेकर कि भारत का पलड़ा भारी पाकिस्तान कश्मीर के मुद्दे को उठाते रहता है उसका कहना है कि कश्मीर बीच में है और दोनों तरफ न्यूक्लियर पावर वाले देश कभी भी वार हो सकता है

Zugzwang 
शतरंज में एक टर्म होती है यह । जिसके अंतर्गत सामने वाले यदि कुछ करता है तो हमें कुछ ना कुछ करना ही पड़ेगा या कोई ना कोई चाल हमें चल नहीं पढ़े यही कंडीशन कश्मीर को लेकर की हुई यदि वह पर कोई अटैक होता है तो भारत को कुछ ना कुछ जवाब देना ही पड़ेगा

पाकिस्तान को डील करने के लिए भारत ने तीन स्ट्रेटजी बनाया पहली बात यदि हम पाकिस्तान के साथ किसी भी प्रकार की डील करते हैं उसमें केवल हमारी कंडीशन रखी जाएंगी जबकि पहले प्रीकंडीशन पाकिस्तान रखता था 

दूसरी बात यह है न्यूक्लियर पावर को लेकर के इंडिया डरता नहीं इसलिए वह सर्जिकल स्ट्राइक कर पाया क्योंकि दोनों कंट्री न्यूक्लियर पावर वाली हैं  तो जो  cross-border टेररिज्म है उसको काउंटर करने के लिए इंडिया डरता नहीं है कि पाकिस्तान के पास में न्यूक्लियर हथियार है

 तीसरा सबसे बड़ा बाप पूर्ण मुद्दा था कश्मीर का स्टेटस 2019 में बदल दिया गया

इन सब बातों को पाकिस्तान इग्नोर भी नहीं कर सकता है इसलिए 2003 में एक सीजफायर एग्रीमेंट हुआ था उसी को वापस लाने के लिए फरवरी 2021 में सीजफायर को लेकर के पाकिस्तान में बातचीत चालू करें

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