क्वैड कितना सफल रहा है अपने लक्ष्य के लिए ?

क्वैड कितना सफल रहा है अपने लक्ष्य के लिए ? 

हाल ही में क्वाड देशों की सेकंड इन पर्सन लीडर्स समिट का आयोजन टोक्यो में 24 मई को हुआ यहां से एक बात क्लियर हो गई है कि यह जो ग्रुप है वह इंडो पेसिफिक रीजन की सिक्योरिटी और प्रोस्पेरिटी के लिए काम करते रहेगा ।

यहां पर इंडिया और अमेरिका संबंध में भी बातचीत हुई भारत और अमेरिका के संबंधों में रसिया यूक्रेन वाला बुद्धा बहुत अहमियत रखता है शुरुआत में इंडिया ने रसिया को क्रिटिसाइज नहीं किया उनको इंडिया ने ऊपर ल सपोर्ट नहीं किया वहां से अपडेट कर दिया
इससे इंडिया और यूएस के जिससे थोड़े बिगड़ते नजर आए सब को लगा कि क्या होने वाला है यूक्रेन के मुद्दे को लेकर के यूएस और अमेरिका दोनों का एक परसेंट रहेगा या फिर ऐसा हो सकता है कि इंडिया यदि सहमत नहीं हो सकता अमेरिका के साथ में अमेरिका शायद हमारे ऊपर सैंक्शन लगा दे लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ बल्कि अमेरिका हमारी इस सोच का सपोर्ट कर रहा है और इंडिया के साथ में हर लेवल पर वह इंगेज करने के लिए तैयार है रिसेंटली यह बोलते हुए नजर आए हैं इंडिया और यूएस वन ऑफ द मोस्ट लार्जेस्ट पार्टनर है .

स्क्वाड जॉइंट लीडर्स स्टेटमेंट सामने आया जिसमें कहा गया फ्री ऑफर अवर रिजल्ट अप फोल्डर इंटरनेशनल बॉर्डर वेयर कंट्रीज आर फ्री फ्रॉम ऑल ऑफ मिलिट्री इकोनामिक एंड पॉलीटिकल coerison.

Quad का एजेंडा अभी 9 सेक्टर को कवर करता है  
पहला है वैक्सीन पार्टनरशिप और हेल्थ सिक्योरिटी क्लाइमेट एक्शन क्रिटिकल और इमर्जिंग टेक्नोलॉजी इंफ्रास्ट्रक्चर में कॉर्पोरेशन साइबर सिक्योरिटी स्पेस में कॉर्पोरेशन एजुकेशन और पीपल टो पीपल टाई इसके अलावा मैरिटाइम डोमेन अवेयरनेस मानवीय सहायता और डिजास्टर रिलीफ

कुछ मामलों में ग्रुप पीछे भी रह गया है जैसे कि एक बिलियन कोविड-19 डॉस प्रोवाइड करेंगे इंडो पेसिफिक रीजन कंट्री को लेकिन केवल इसका 25 परसेंट ही हिस्सा अभी प्रोवाइड किया गया है तो बाकी जो बचे भी चीजें हैं उसको पूरा करने की जरूरत है इसके अलावा इस ग्रुप में 50 बिलियन डॉलर के इन्वेस्टमेंट फॉर असिस्टेंट का वादा किया था इंडोपेसिफिक देशों के लिए आने वाले नेक्स्ट 5 ईयर के लिए इसके अलावा कॉमन स्टेटमेंट ऑफ प्रिंसिपल है किसमें क्रिटिकल टेक्नोलॉजी सप्लाई चैन यह बहुत महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि यह चिंता की बात है सेमीकंडक्टर के कोऑपरेशन को लेकर 

हाल ही में आईपीएफ इंडो पेसिफिक इकोनामिक फ्रेमवर्क फॉर प्रोस्पेरिटी साइन किया गया है इसमें जॉइंट अनाउंसमेंट किया गया था इस ग्रुप के द्वारा इसमें थे साथ आसियान मेंबर स्टेट इसमें एक्स क्ट कर दिया गया है म्यानमार को कंबोडिया को और लाओस  को
इसके अलावा इसमें शामिल है साउथ कोरिया और न्यूजीलैंड


कुल मिलाकर के अभी के लिए 13 मेंबर हैं और आगे चलकर इनको बढ़ाया भी जा सकता है इस 13 मेंबर के ग्रुप के द्वारा जो सप्लाई चैन चाइना में घुसी हुई है उन सप्लाई चैन को इंडिया की तरफ खींचने की कोशिश की गई है यदि हम इसको इंडिया की तरफ नहीं लाते हैं तो ओवरऑल जो बाकी कंट्री इस ग्रुप के वहां से हम अपने इंपोर्ट्स को मंगवा सकते हैं इस इसी से चाइना के ऊपर जो हमारी निर्भरता है वह कम होगी इंडिया इस ग्रुप में भी शामिल है इसके अलावा इंडिया ने कहा है हम ब्रिक्स के एक्सपेंशन को भी सपोर्ट करते हैं लेकिन इसके लिए इंडिया चाहता है कि ब्रिक्स में पाकिस्तान नहीं आना चाहिए इस प्रकार से इंडिया दोनों ग्रुप में शामिल हो रहा है इसका मतलब यह हो गय कि वह अपने इंटरनेशनल इंटरेस्ट को स्ट्रैटेजिक और ऑटोनॉमी के साथ पर क्यों कर रहा है क्योंकि बहुत जबरदस्त चीज है

हम इंटरनेशनल अपने ऐमबीट को डायवर्सिफाई कर रहे हैं और उसी टाइम हम साइना को पुशबैक भी कर रहे हैं यूएस के साथ भी अपने रिलेशन बना रहे हैं।

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