governor राज्यपाल

राज्यपाल
राज्यपाल को यह शक्ति प्राप्त है कि वह राज्य सरकार को हटाने और विधानसभा भंग करने की सिफारिश राष्ट्रपति को भेज सकता है।

 इसके अलावा नॉर्मल स्थिति में भी राज्यपाल को यह शक्ति प्राप्त है कि वह विधानसभा द्वारा पारित किसी विधेयक को राष्ट्रपति की स्वीकृति के लिए अपने पास रख सकता है ।

इससे केंद्र सरकार कोई अवसर मिल जाता है, कि वह किसी राज्य के कानून निर्माण में देरी कर सकती है ,और यदि चाहे तो ऐसे भी देखो की परीक्षा करके उनको वीटो का प्रयोग करके रोक सकती है ।
विवाद 
राज्यपाल को लेकर केंद्र सरकार और राज्य सरकार में हमेशा विवाद होते रहता है ।

क्योंकि राज्यपाल निर्वाचित पदाधिकारी नहीं होता उसका निर्वाचन नहीं होता है । जनता उसको नहीं चुनती है , बल्कि वह रिटायर्ड सैनिक ऑफिसर ,पब्लिक सर्वेंट या फिर राजनीतिज्ञ होते हैं।
राज्यपाल की नियुक्ति केंद्र सरकार के द्वारा की जाती है .राजपाल के फैसलों को अक्सर राज्य सरकार की कार्यों में केंद्र सरकार का हस्तक्षेप के रूप में देखा जाता है .

केंद्र और राज्य संबंधों को पता करने के लिए 1983 में एक सरकारिया आयोग बनाया गया इस ने 1998 में अपनी रिपोर्ट दी.
और यह भी कहा कि राज्यपालों की नियुक्ति अनिवार्य और निष्पक्ष होकर होनी चाहिए .

एक और परिस्थिति है जिसमें सबसे ज्यादा टकराव होता है केंद्र सरकार और राज्य सरकार का.
 अनुच्छेद 356 कहता है कि राज्यों में राष्ट्रपति शासन लागू किया जा सकता है .

इसको तभी लागू करेंगे जब ऐसी स्थिति उत्पन्न हो जाएगी उस राज्य का शासन संविधान के बंधुओं के अनुसार नहीं चलाया जा सकता.

 इसमें केंद्र सरकार राज्य सरकार का अधिग्रहण कर लेगी .

लेकिन इस घोषणा के लिए संसद की स्वीकृति जरूरी है.

 राष्ट्रपति शासन को अधिकतम 3 वर्षों तक बढ़ा सकते हैं .

राज्यपाल को यह पावर है कि वह राज्य सरकार को बर्खास्त करने और विधानसभा को निलंबित या फिर विकसित करने की अनुशंसा वह कर सकता है .

कई बार क्या होता है राज्य सरकार के पास बहुमत भी है तो भी उस को बर्खास्त कर दिया जाता है ऐसे कई सारे किए हैं.

 1959 और 1967 के बाद अनेक राज्यों में बहुमत की परीक्षा के बिना ही गवर्नमेंट को बर्खास्त कर दिया गया .

ऐसे केस सुप्रीम कोर्ट गए सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई किया कि देखो राष्ट्रपति शासन की जांच पडताल की जा सकती है.

यदि केंद्र में बीजेपी की सरकार है और राज्य में अन्य पार्टी की  सरकार है  तो इस स्थिति में तो विवाद और भी ज्यादा होते ही रहता है -
🔘जैसे हम कोलकाता का एग्जांपल देखें हैं ,जहां पर आए दिन राज्यपाल और वहां की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बीच टकराव होते रहता है .
🔘 दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और वहां के उपराज्यपाल के बीच में विवाद।


कौन ज्यादा पावरफुल
केंद्र सरकार राज्य सरकार के अंतर्गत आने वाले विषयों पर कानून बना सकती हैं ।

लेकिन इससे पहले उसको राज्यसभा की अनुमति लेना जरूरी है ।

 संविधान में यह बात कही गई है कि केंद्र सरकार की शक्ति राज सरकार की शक्ति से ज्यादा होगी।


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