खनिज संरक्षण और विकास (संशोधन) नियम- 2021 Mineral Conservation and Development (Amendment) Rules, 2021

  खनिज संरक्षण और विकास (संशोधन) नियम- 2021 

खान मंत्रालय ने 3 नवंबर, 2021 को खनिज संरक्षण और विकास (संशोधन) नियम- 2021 को खनिज संरक्षण और विकास नियम, 2017 [एमसीडीआर] में संशोधन करने के लिए अधिसूचित किया है।

 नियम उपलब्ध कराने के लिए 

  • खनिजों के संरक्षण, 
  • व्यवस्थित व वैज्ञानिक खनन, 
  • देश में खनिज के विकास और पर्यावरण की सुरक्षा के संबंध में नियम उपलब्ध कराने के लिए एमसीडीआर को खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957 [एमएमडीआर अधिनियम] की धारा 18 के तहत बनाया गया है।

 इन नियमों में संशोधन के प्रमुख बिंदु निम्नलिखित हैं:

डिजिटल वैश्विक स्थिति निर्धारण प्रणाली (डीजीपीएस) या कुल स्टेशन या ड्रोन सर्वेक्षण 

(i)  भारतीय खान ब्यूरो (आईबीएम) के विशिष्ट निर्देश के अनुरूप खान से संबंधित सभी योजना और खंडों को डिजिटल वैश्विक स्थिति निर्धारण प्रणाली (डीजीपीएस) या कुल स्टेशन या ड्रोन सर्वेक्षण के संयोजन का उपयोग कर कुछ या सभी पट्टों के संबंध में तैयार किए जाएंगे।

 

 डिजिटल फोटो जमा करने का प्रावधान

 (ii) पट्टेदार और आशयपत्र धारकों के खनन क्षेत्र की डिजिटल फोटो जमा करने का प्रावधान करने के लिए नए नियम को जोड़ा गया है। 

1 मिलियन टन या उससे अधिक की वार्षिक खनन योजना वाले पट्टेदारों या 50 हेक्टेयर या उससे अधिक के पट्टे वाले क्षेत्र केपट्टेदारों को हर साल पट्टा क्षेत्र और पट्टे की सीमा से 100 मीटर बाहर तक की ड्रोन सर्वेक्षण फोटो जमा करने की जरूरत है। 


अन्य पट्टेदारों को हाई रेजोल्यूनश सैटेलाइट फोटो जमा करने होंगे। 

इस कदम से न केवल खान नियोजन अभ्यासों, खानों की सुरक्षा में सुधार होगा, बल्कि खनन कार्यों का बेहतर पर्यवेक्षण भी सुनिश्चित होगा।

(iii) नियम 34ए के अनुसार 

हाई रिजोल्यूशन जियोरिफ्रेन्सड अर्थो-रेक्टिफाइड मल्टीस्पेक्ट्रल सैटेलाइट फोटो जमा करने और ड्रोन सर्वेक्षण के उपयोग के लिए कार्टोसैट-2 उपग्रह लाआईएसएस-IV सेंसर से प्राप्त सैटेलाइट फोटो को भू-संपत्ति मानचित्र के पैमाने पर जमा करने की जरूरत को प्रावधान की प्रविष्टि के मद्देनजर हटा दिया गया है।

(iv) अनुपालन के बोझ को कम करने के लिए 

दैनिक रिटर्न के प्रावधान को हटा दिया गया है। 

वहीं, मासिक या वार्षिक रिटर्न में अधूरी या गलत या फर्जी जानकारी के खिलाफ कार्रवाई करने की शक्ति राज्य सरकार के अतिरिक्त आईबीएम को भी दी गई है।

(v) 25 हेक्टेयर से कम के पट्टे वाले क्षेत्र 'ए' श्रेणी की खदानों के लिए एक अंशकालिक (पार्ट टाइम) खनन इंजीनियर या एक अंशकालिक भू-वैज्ञानिक की नियुक्ति की अनुमति दी गई है। इससे छोटे खनिकों पर अनुपालन बोझ कम होगा।

(vi) रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए, 

खान सुरक्षा महानिदेशक द्वारा जारी पात्रता के एक द्वितीय श्रेणी प्रमाण पत्र के साथ विधिवत मान्यता प्राप्त संस्थान की ओर से दिया गया खनन और खान सर्वेक्षण में डिप्लोमा को पूर्णकालिक खनन इंजीनियर के लिए तय पात्रता में जोड़ा गया है। 

इसके अलावा अंशकालिक खनन इंजीनियर के लिए भी पात्रता जोड़ी गई है।

(vii) नियमों में दंड संबंधी प्रावधानों को युक्तिसंगत बनाया गया है।

 पहले 

-नियम उल्लंघन की गंभीरता के बावजूद हर नियम के उल्लंघन के लिए 2 साल तक के कारावास या 5 लाख रुपये तक के जुर्माने या दोनों, के प्रावधान थे। 

नियमों में संशोधन निम्नलिखित प्रमुख शीर्षकों के तहत नियमों के उल्लंघन को वर्गीकृत करता है:

क. बड़े उल्लंघन: कारावास की सजा, जुर्माना या दोनों।

ख. मामूली उल्लंघन: जुर्माने को कम किया गया, ऐसे उल्लंघनों के लिए केवल जुर्माने का दंड निर्धारित किया गया है।

ग. अन्य नियमों के उल्लंघन को अपराध की श्रेणी से हटा दिया गया है। इन नियमों में रियायत पाने वाले या किसी अन्य व्यक्ति पर कोई विशिष्ट बाध्यता को आरोपित नहीं किया। इस तरह, 24 नियमों के उल्लंघन को अपराध मुक्त कर दिया गया है।

 वित्तीय बीमा या परफॉरमेंस सिक्योरिटी को जब्त करने 

(viii) निर्धारित अवधि के भीतर अंतिम खदान बंद करने की योजना प्रस्तुत न करने की स्थिति में पट्टाधारक के वित्तीय बीमा या परफॉरमेंस सिक्योरिटी को जब्त करने के प्रावधान को जोड़ा गया है।

बीमा की राशि को मौजूदा तीन और दो लाख 

(ix) श्रेणी 'ए' और श्रेणी ‘बी’ की खदानों के लिए वित्तीय क्रमशः  बीमा की राशि को मौजूदा तीन और दो लाख रुपये से बढ़ाकरपांच लाख रुपये और तीन लाख रुपये कर दिया गया है।

संशोधन नियम की अधिसूचना खान मंत्रालय की वेबसाइट  (www.mines.gov.in) पर उपलब्ध है।


source pib 

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