cop 26 Glasgow and India

Cop 26 में भारत का क्या पक्ष था ? 

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विश्व में कितना योगदान है भारत का ? 

 विश्व की आबादी का 17 प्रतिशत होने के बावजूद, जिसकी emissions में Responsibility सिर्फ 5 प्रतिशत रही है,उस भारत ने अपना कर्तव्य पूरा करके दिखाने में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी है।

विश्व में चौथे नंबर पर है
आज भारत installed renewable energy capacity में विश्व में चौथे नंबर पर है।

Non Fossil Fuel Energy 

बीते 7 वर्षों में भारत की Non Fossil Fuel Energy में 25 परसेंट से ज्यादा की वृद्धि हुई है।और अब ये हमारे एनर्जी मिक्स का 40 परसेंट पहुंच गया है।

नेट जीरो टारगेट रेलवे का 

विश्व की पूरी आबादी से भी अधिक यात्री, भारतीय रेल से हर वर्ष यात्रा करते हैं। इस विशाल रेलवे सिस्टम ने अपने आप को 2030 तक ‘Net Zero’ बनाने का लक्ष्य रखा है। अकेली इस पहल से सालाना 60 मिलियन टन एमिशन की कमी होगी।

इसी प्रकार हमारे विशाल LED बल्ब अभियान 

से सालाना 40 मिलियन टन एमिशन कम हो रहा है।आज भारत दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ, ऐसे कई सारे Initiatives पर तेजी से काम कर रहा है।

  एक शब्द है- LIFE...एल, आई, एफ, ई,

यानि Lifestyle For Environmentआज जरूरत है कि हम सभी लोग, एक साथ आकर, कलेक्टिव पार्टिसिपेशन के साथ, Lifestyle For Environment यानि LIFE को एक अभियान की तरह आगे बढ़ाएं।

ये Environmental Conscious 

Life Style का एक Mass Movement बन सकता है।आज आवश्यकता है, Mindless और Distructive (डिस्ट्रक्टिव) Consumption (कन्जम्प्शन) के बजाय, MindFul और Deliberate (डेलिबरेट) Utilisation की।

ये मूवमेंट, एक साथ मिलकर, ऐसे लक्ष्य तय कर सकता है, जो Diverse Areas जैसे फिशिंग, एग्रीकल्चर, वेलनेस, Dietry Choices, Packaging (पैकेजिंग), Housing, Hospatility (हॉस्पिटैलिटी), Tourism, Clothing (क्लोदिंग), Fashion, Water management और Energy जैसे अनेक सेक्टर्स में एक क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है।
ये ऐसे विषय हैं, जहां हम में से प्रत्येक को हर रोज Conscious choice करनी होगी। 

 पंचामृत की सौगात 

पहला- भारत, 2030 तक अपनी Non-Fossil Energy Capacity को 500 गीगावाट तक पहुंचाएगा।

दूसरा- भारत, 2030 तक अपनी 50 प्रतिशत energy requirements, renewable energy से पूरी करेगा।

तीसरा- भारत अब से लेकर 2030 तक के कुल प्रोजेक्टेड कार्बन एमिशन में एक बिलियन टन की कमी करेगा।

चौथा- 2030 तक भारत, अपनी अर्थव्यवस्था की कार्बन इंटेन्सिटी को 45 प्रतिशत से भी कम करेगा।

और पांचवा- वर्ष 2070 तक भारत, नेट जीरो का लक्ष्य हासिल करेगा।

ये पंचामृत, क्लाइमेट एक्शन में भारत का एक अभूतपूर्व योगदान होंगे।

climate फाइनेंस

ये सच्चाई हम सभी जानते हैं कि क्लाइमेट फाइनेंस को लेकर आज तक किए गए वायदे, खोखले ही साबित हुए हैं।

जब हम सभी climate एक्शन पर अपने ambitions बढ़ा रहे हैं, तब climate फाइनेंस पर विश्व के ambition वहीँ नहीं रह सकते जो पेरिस अग्रीमेंट के समय थे।

क्या जरूरी है 

आज जब भारत ने एक नए कमिटमेंट और एक नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ने का संकल्प लिया है,तो ऐसे समय में क्लाइमेट फाइनेंस और low cost climate technologies का ट्रांसफर और महत्वपूर्ण हो जाता है।

भारत की अपेक्षा है कि विकसित देश 

जल्द से जल्द 1 ट्रिलियन डॉलर का क्लाइमेट फाइनेंस उपलब्ध कराएं।आज आवश्यकता है कि जैसे हम climate mitigation में हुई प्रगति को ट्रैक करते हैं वैसे ही हम climate finance को भी ट्रैक करें। 


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