वन सन, वन वर्ल्ड, वन ग्रिड

क्या है उद्देश्य ?

वन सन, वन वर्ल्ड एंड वन ग्रिड' न केवल भंडारण की जरूरतों को कम करेगा बल्कि सौर परियोजनाओं की व्यवहार्यता को भी बढ़ाएगा.

  • वन सन, वन वर्ल्ड, वन ग्रिड’ की अवधारणा को ब्रिटेन ने ‘ग्रीन ग्रिड’ के रूप में प्रस्तुत किया है।
  • इस अवधारणा का प्रमुख उद्देश्य दुनिया भर में सौर ऊर्जा की आपूर्ति करने वाला एक ‘ट्रांस-नेशनल बिजली ग्रिड’ विकसित करना है।
 जीवाश्म ईंधन (fossil fuels) के उपयोग ने कुछ देशों को समृद्ध तो बनाया लेकिन इसने पृथ्वी और पर्यावरण को खराब बना दिया है. जीवाश्म ईंधन की रेस ने भी भू-राजनीतिक तनाव पैदा किया.

वन सन-वन वर्ल्ड समस्या का समाधान'

 सौर ऊर्जा पूरी तरह से स्वच्छ और टिकाऊ है. चुनौती यह है कि यह ऊर्जा केवल दिन के समय उपलब्ध होती है और मौसम पर निर्भर करती है. 

'वन सन, वन वर्ल्ड एंड वन ग्रिड' इस समस्या का समाधान है. विश्वव्यापी ग्रिड के माध्यम से, स्वच्छ ऊर्जा को कहीं भी और कभी भी प्रेषित किया जा सकता है.

वन सन, वन वर्ल्ड एंड वन ग्रिड' न केवल भंडारण की जरूरतों को कम करेगा बल्कि सौर परियोजनाओं की व्यवहार्यता को भी बढ़ाएगा. यह रचनात्मक पहल न केवल कार्बन फुटप्रिंट्स और ऊर्जा लागत को कम करेगी बल्कि कई देशों और क्षेत्रों के बीच सहयोग के लिए एक नया रास्ता खोलेगी.

प्रधानमंत्री ने COP26 में अपने संबोधन में कहा, 'मुझे उम्मीद है कि 'वन सन, वन वर्ल्ड एंड वन ग्रिड' और 'ग्रीन ग्रिड' पहल के बीच सहयोग से एक साझा और मजबूत वैश्विक ग्रिड विकसित किया जा सकता है. भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी इसरो दुनिया को सोलर कैलकुलेटर एप्लीकेशन उपलब्ध कराने जा रही है.'

  • ‘वन सन, वन वर्ल्ड, वन ग्रिड’ या ‘ग्रीन ग्रिड’:
    • ‘वन सन, वन वर्ल्ड, वन ग्रिड’ की अवधारणा 'द सन नेवर सेट्स' यानी ‘सूरज कभी अस्त नहीं होता’ और यह किसी भी भौगोलिक स्थान पर, विश्व स्तर पर, किसी भी समय स्थिर रहता है, के विचार पर ज़ोर देती है।
    • यह अब तक किसी भी देश द्वारा शुरू की गई सबसे महत्त्वाकांक्षी योजनाओं में से एक है और आर्थिक लाभ साझा करने के मामले में इसका वैश्विक महत्त्व है।
    • इसे विश्व बैंक के तकनीकी सहायता कार्यक्रम के तहत शुरू किया गया है।
    • ‘वन सन, वन वर्ल्ड, वन ग्रिड’ योजना भारत द्वारा सह-स्थापित अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) का भी लाभ उठा सकती है, जिसमें वर्तमान में तकरीबन 80 देश शामिल हैं।
    • वैश्विक स्तर पर सौर स्पेक्ट्रम को दो व्यापक क्षेत्रों में विभाजित किया जा सकता है, जो हैं:
      • सुदूर पूर्व, जिसमें म्याँमार, वियतनाम, थाईलैंड, लाओ, कंबोडिया जैसे देश शामिल हैं।
      • सुदूर पश्चिम, जो कि मध्य पूर्व और अफ्रीका क्षेत्र को कवर करता है।
  • योजना के तीन चरण:
    • पहला चरण: यह एशियाई महाद्वीप के देशों के बीच परस्पर ग्रिड संपर्क स्थापित करेगा।
    • दूसरा चरण: इसमें अफ्रीका को जोड़ा जाएगा।
    • तीसरा चरण: यह वैश्विक इंटरकनेक्शन पर ध्यान केंद्रित करेगा।
  • परियोजना का महत्त्व:
    • यह नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों में निवेश को आकर्षित करने के साथ-साथ कौशल, प्रौद्योगिकी और वित्त का इष्टतम उपयोग करने में सभी संलग्न संस्थाओं की सहायता करेगी।
    • इससे परियोजना लागत में कमी आएगी, दक्षता में सुधार होगा और संपत्ति उपयोगिता में बढ़ोतरी होगी।
    • इसके परिणामस्वरूप प्राप्त होने वाले आर्थिक लाभों से गरीबी उन्मूलन और जल, स्वच्छता, भोजन एवं अन्य सामाजिक-आर्थिक चुनौतियों को कम करने में सहायता मिलेगी।
    • भारत में ‘राष्ट्रीय नवीकरणीय ऊर्जा प्रबंधन केंद्रों’ को क्षेत्रीय और वैश्विक प्रबंधन केंद्रों के रूप में विकसित होने का अवसर मिलेगा।
      • यह कदम कोरोना के समय में भारत को वैश्विक रणनीतियों को विकसित करने में अग्रणी होने का अवसर देता है

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