GST में लाभ के बावजूद, यह अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था अभी भी वास्तव में सरल या सक्षम नहीं बन पाई है
GST में लाभ के बावजूद, यह अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था अभी भी वास्तव में सरल या सक्षम नहीं बन पाई है
असाधारण धूमधाम के साथ
आधी रात को आहूत संसद के विशेष सत्र में शुभारंभ किए गए वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के भारत में इस महीने छह साल पूरे हो गए।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण
इस अवसर को रेखांकित करते हुए, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस तथ्य पर जोर दिया कि जीएसटी ने देश को एक ऐसी स्थिति,
- जिसमें प्रत्येक राज्य अप्रत्यक्ष कर की अलग-अलग संरचनाओं और प्रक्रियाओं को अनिवार्य करते थे
- और अंतर-राज्यीय सीमाओं पर बाधाएं खड़ी करने वाले चेक-पोस्ट हुआ करते थे
- जिससे ‘लॉजिस्टिक्स’ की लागत में बढ़ोतरी होती थी
- और भारतीय वस्तुओं की प्रतिस्पर्धात्मकता में कमी आती थी, से निकाल कर एक एकीकृत बाजार की दिशा में आगे बढ़ाया है।
विघटनकारी कदम
नोटबंदी के झटके के तुरंत बाद लाए गए जीएसटी को अनौपचारिक अर्थव्यवस्था के लिए एक और विघटनकारी कदम के रूप में देखा गया तथा इसकी शुरुआती तकनीकी, संरचनात्मक एवं प्रक्रियात्मक चुनौतियों को हल करने में थोड़ा वक्त लगा।
धीरे-धीरे इस बदलाव को स्वीकार कर लिया
पांच करोड़ रुपये के वार्षिक टर्नओवर वाले सभी व्यवसायों को इस साल अगस्त से ई-चालान जारी करना अनिवार्य होना / to generate e-invoices और इस पर छोटे व्यवसायों की तरफ से कोई प्रत्यक्ष प्रतिक्रिया न आना, यह दर्शाता है कि तमाम कंपनियों ने धीरे-धीरे इस बदलाव को स्वीकार कर लिया है।
चंद लोगों को भी सही रास्ते पर
कर चोरों द्वारा अपनाई जाने वाली फर्जी चालान और कई अन्य तरकीबों पर राजस्व विभाग की कार्रवाई इस व्यवस्था से बाहर रहने वाले चंद लोगों को भी सही रास्ते पर आने के लिए मजबूर कर सकती है।
जीएसटी से प्राप्त होने वाले राजस्व को बेहतर करने में मदद
कड़े अनुपालन और महामारी के बाद आर्थिक गतिविधियों के वापस पटरी पर लौट आने की कवायद ने जीएसटी से प्राप्त होने वाले राजस्व को बेहतर करने में मदद की है।
जैसा कि सुश्री सीतारमण ने बताया था, 2021 के अंत में परिषद द्वारा बोझिल विविध दर संरचना को तर्कसंगत बनाने और कर प्रवाह को बढ़ाने के लिए / unwieldy multiple rate structure and enhance tax inflows एक मंत्रिस्तरीय समूह का गठन किए जाने तक यह राजस्व बेहद कम था।
tax collection
- इस साल जून में, जीएसटी से प्राप्त होने वाला राजस्व 1.6 लाख करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर गया, जो इसके 72 महीनों के जीवन-काल में केवल चौथा ऐसा मौका था।
- इससे इस साल की पहली तिमाही में औसत राजस्व संग्रह बढ़कर लगभग 1.7लाख करोड़ रुपये हो गया, जोकि पिछले साल की तुलना में 12 फीसदी ज्यादा है।
उन राज्यों के लिए अच्छा संकेत
राजस्व में आया यह हालिया उछाल, भले ही वैश्विक अर्थव्यवस्था के धीमी पड़ते जाने के बीच उपभोग में गिरावट आने की वजह से इसे झटका लग सकता है,
उन राज्यों के लिए अच्छा संकेत है जो पिछले साल जुलाई में जीएसटी मुआवजे के जरिए हासिल होने वाली पांच साल की सुनिश्चित राजस्व की सुविधा के समाप्त होने के बाद अपनी राजकोषीय क्षमता को लेकर चिंतित थे।
अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी
1 हालांकि, करदाताओं और उपभोक्ताओं के लिहाज से जीएसटी को एक अच्छा व सरल कर माने जाने की दिशा में अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है।
2 कोविड-19 लॉकडाउन की वजह से राजस्व पर पड़ने वाले क्षणिक झटके के मद्देनजर, जीएसटी मुआवजा उपकर को शुरुआती पांच साल के कार्यकाल के बजाय कम से कम मार्च 2026 तक बढ़ा दिया गया है।
3 जीएसटी अपीलीय न्यायाधिकरण - के अभी भी स्थापित नहीं हो पाने से विवाद समाधान उद्योग जगत के लिए एक समस्या बना हुआ है।
4 कर के दर को तर्कसंगत बनाने या कर व्यवस्था के दायरे से बाहर पड़े बिजली, पेट्रोलियम और रियल एस्टेट जैसे मदों को इसमें शामिल करने का कोई रोडमैप नजर नहीं आता है।
इसके बिना जीएसटी से मिलने वाला दक्षता संबंधी लाभ सीमित ही रहेगा।
5 जीएसटी परिषद - को और ज्यादा बैठक करने तथा अपनी कार्य सूची को ‘शीघ्रता के साथ अवश्य करने वाली’ सूची में तब्दील करने की जरूरत है।
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