एलके-99
कमरे के तापमान पर काम करने वाले सुपरकंडक्टर की खोज अभी खत्म नहीं हुई है
एलके-99
वैज्ञानिक समुदाय को अब इस बात का विश्वास हो गया है कि एलके-99 के नाम से जानी जाने वाली सामग्री कमरे के तापमान और परिवेशीय दबाव पर काम करने वाली अतिचालक (सुपरकंडक्टर) नहीं है।
अतिचालकता:
किसी प्रतिरोध के बिना विद्युत धारा को प्रवाहित करने की किसी पदार्थ की क्षमता को अतिचालकता कहा जाता है। यह तब होता है जब किसी पदार्थ को क्रांतिक ताप (Critical Temperature) से नीचे ठंडा किया जाता है।बिना किसी प्रतिरोध के बिजली की धारा का परिवहन
इससे दक्षिण कोरियाई शोधकर्ताओं के एक समूह द्वारा शुरू किए गए एक रोमांचक प्रकरण का तेजी से पटाक्षेप हो गया है। इस औपचारिक घोषणा से मेल खाने वाला कोई औपचारिक निष्कर्ष नहीं निकला है कि यह सामग्री परिवेशी परिस्थितियों में बिना किसी प्रतिरोध के बिजली की धारा का परिवहन कर सकती है।
लेकिन दावे को सत्यापित करने के लिए काम करने वाले दक्षिण कोरियाई और स्वतंत्र वैज्ञानिकों ने अपने निष्कर्षों को मुद्रण-पूर्व शोध प्रबंध (प्रीप्रिंट पेपर) के रूप में प्रकाशित किया, जो पढ़ने के लिए मुक्त हैं।
एलके-99 की प्रकट रूप से सरल संरचना
और इसे संश्लेषित करने के निर्देशों की उपलब्धता ने शिक्षा जगत के बाहर के वैज्ञानिकों को भी इस सामग्री का परीक्षण करने के लिए प्रेरित किया।
इन घटनाक्रमों की रफ्तार उत्साहजनक थी, लेकिन जल्दी ही इसको लेकर प्रचार और गलत सूचनाएं फैल गई।
दो वजहें
चुंबक को आधा ही प्रतिकर्षित
जल्द ही यह साफ हो गया कि इस सामग्री के अतिचालक (सुपरकंडक्टर) न होने की दो वजहें हैं।
पहला, ज्योंहि किसी पारंपरिक अतिचालक को एक कमजोर चुंबकीय क्षेत्र के भीतर अतिचालकता की स्थिति पैदा करने के लिए ठंडा किया जाता है, वे संक्रमण वाले तापमान पर और उसके नीचे अपने आयतन से चुंबकीय क्षेत्र को बाहर कर देते हैं।
लिहाजा, संक्रमण के दौरान अतिचालक के पास मौजूद एक चुंबक दूर धकेल दिया जाता है।
दक्षिण कोरियाई समूह ने एक वीडियो साझा किया था जिसमें एलके-99 एक चुंबक को आधा ही प्रतिकर्षित करता हुआ दिखाई दिया।
लेकिन स्वतंत्र शोधकर्ताओं ने इस सामग्री को एक विसंवाहक (इन्सुलेटर) या बिजली की धारा को रोकने वाला पाया, जिसकी अशुद्धियों को चुम्बकित किया जा सकता था जिससे वीडियो में देखा गया आधा-प्रतिकर्षण संभव हो सकता था।
विद्युत प्रतिरोधकता लगभग 104 डिग्री सेल्सियस तापमान पर तेजी से गिर गई
दूसरा, दक्षिण कोरियाई लोगों ने बताया कि एलके-99 की विद्युत प्रतिरोधकता लगभग 104 डिग्री सेल्सियस तापमान पर तेजी से गिर गई, जो अतिचालकता का एक संभावित संकेत है।
लेकिन वैज्ञानिकों ने कहा कि अगर सामग्री में अशुद्धियों के रूप में कॉपर सल्फाइड मौजूद हो तो प्रतिरोधकता में इस किस्म की गिरावट देखी जा सकती है।
कॉपर सल्फाइड उक्त तापमान पर एक चरणबद्ध संक्रमण से गुजरता है, जिससे प्रतिरोधकता प्रभावित हो जाती है।अब, साक्ष्य का बोझ दक्षिण कोरियाई समूह के कंधों पर वापस आ गया है।
इस प्रकरण में सूचना और डेटा के ऑनलाइन प्रसार ने बहुत कुछ ऐसा हासिल किया जो दुनिया में पहले शायद ही कभी हुई हो: लगभग-वास्तविक समय में और भीड़ द्वारा व्यवस्थित दस्तावेज़ीकरण, प्रतिस्पर्धा के बजाय सहयोग और समापन।
विज्ञान की खुली गतिविधियों में भागीदारी और ज्यादा अच्छे विज्ञान को संभव बना सकता है, लेकिन साथ ही नकारात्मक विश्वास वाले तत्वों की मौजूदगी गलतफहमी और भ्रम को भी जन्म दे सकती है। एलके-99 प्रकरण से यह पता चलता है कि नकारात्मक तत्वों के साथ दुराव की वजह से सकरात्मक तत्वों को पीछे नहीं हटना चाहिए।
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