Manipur में फिर से हिंसा – Arambai Tenggol का उभार


Manipur में फिर से हिंसा – Arambai Tenggol का उभार



मणिपुर में थोड़े समय के शांति के बाद फिर से हिंसा शुरू हो गई जब 7 जून की रात को सुरक्षा बलों ने Arambai Tenggol (AT) नाम के एक चरमपंथी Meitei समूह के स्वयंभू ‘army chief’ Asem Kanan Singh को गिरफ्तार कर लिया। अगले दिन CBI ने उन्हें इम्फाल एयरपोर्ट से हिरासत में लिया और पूछताछ के लिए Guwahati ले जाया गया।



🔹 गिरफ्तारी से उपजा तनाव



Asem Kanan Singh, जो मणिपुर पुलिस में हेड कांस्टेबल थे लेकिन अब सस्पेंड हो चुके हैं, उनकी गिरफ्तारी के बाद AT ने पूरे Imphal Valley में 10 दिन का बंद (shutdown) कर दिया था। हालांकि चौथे दिन सरकार के इस बयान के बाद कि उन्हें AT से जुड़े होने के कारण नहीं बल्कि criminal cases के चलते पकड़ा गया है, हालात थोड़े शांत हुए।


उनके खिलाफ जो मामले हैं उनमें से एक arms smuggling (हथियारों की तस्करी) से जुड़ा मामला 2020 का है, जो खुद Arambai Tenggol संगठन के बनने के समय का है।





Arambai Tenggol: नाम, इतिहास और पहचान



Arambai Tenggol नाम दो पारंपरिक शब्दों से लिया गया है —


  • Arambai: यह एक जहरीले भाले जैसा हथियार होता था, जो मणिपुरी राजाओं की सेना Burmese (बर्मा) आक्रमणकारियों पर इस्तेमाल करती थी।
  • Tenggol: एक cavalry (घुड़सवार सेना) की टुकड़ी को दर्शाता है।



इस समूह का मुख्य निशाना Kuki-Zo समुदाय रहा है, जिन्हें यह लोग म्यांमार से आए “अवैध घुसपैठिए” मानते हैं।





गठन और विचारधारा



AT का गठन मणिपुर के सांकेतिक राजा और BJP के राज्यसभा सांसद Leishemba Sanajaoba ने किया था।


  • यह संगठन ‘Salai Taret’ नामक झंडे का इस्तेमाल करता है, जो सात Meitei कुलों (clans) का प्रतीक है।
  • समूह Sanamahi faith (Meitei लोगों का pre-Hindu धर्म) को फिर से स्थापित करने और पुराने Meitei राज्य Kangleipak की गौरवशाली विरासत को वापस लाने की बात करता है।



इसके मुखिया का नाम Korounganba Khuman है, जिन्हें उनके साथी Pathou (revered leader) कहते हैं।

AT के सदस्यों की संख्या करीब 60,000 बताई जाती है और वे काले T-shirt पहनते हैं, जिसमें तीन घुड़सवार योद्धाओं का लाल चिन्ह (red insignia) बना होता है।





Meitei Leepun और AT की तुलना



AT की चर्चा 2022 में शुरू हुई, लेकिन इसके साथ-साथ एक और चरमपंथी Meitei समूह Meitei Leepun भी सुर्खियों में आया। Meitei Leepun की स्थापना 2015 में Pramot Singh ने की थी।

लेकिन मई 2023 में जब Meitei और Kuki-Zo समुदायों के बीच ethnic conflict (नस्लीय संघर्ष) शुरू हुआ, तो AT अपनी आक्रामक और सशस्त्र (armed) गतिविधियों के कारण ज्यादा प्रभावशाली बनकर उभरा।


AT खुद को Meitei राजाओं के योद्धाओं के वंशज मानता है। संघर्ष के दौरान, उन पर आरोप लगा कि उन्होंने:


  • Police armouries से हथियार लूटे,
  • Kuki-Zo लोगों पर हमला किया,
  • सड़क ब्लॉकेज और आगजनी (arson) की घटनाएं कीं,
  • और हत्याएं कीं।






Parallel Government (समानांतर सरकार)



कहा जाता है कि AT को मणिपुर के तत्कालीन मुख्यमंत्री N. Biren Singh का समर्थन था और इस समूह ने संघर्ष के दौरान एक समानांतर सरकार की तरह काम किया।


जनवरी 2024 में, AT ने मणिपुर की राजधानी इम्फाल के ऐतिहासिक Kangla Fort में राज्य के दो सांसदों (MPs) और 37 विधायकों (MLAs) को बुलाया और:


  • मणिपुर की अखंडता की रक्षा की शपथ दिलवाई
  • केंद्र सरकार को भेजने के लिए 6 सूत्रीय मांग पत्र पर हस्ताक्षर करवाए



AT ने फेसबुक पर चेतावनी दी थी कि जो नेता नहीं आएंगे, उन्हें “Meiteis के दुश्मन” माना जाएगा और उनके खिलाफ कार्रवाई होगी।





President’s Rule और आत्मसमर्पण



13 फरवरी 2024 को मणिपुर में President’s Rule लागू कर दिया गया और उसके कुछ दिन बाद मुख्यमंत्री Biren Singh ने इस्तीफा दे दिया। इसके बाद AT कमजोर पड़ा और उसने 300 हथियारों का आत्मसमर्पण किया, जो संघर्ष के दौरान लूटे गए थे।





AT का राष्ट्रवादी (Nationalist) दृष्टिकोण



AT खुद को भारत विरोधी नहीं मानता। यह Meitei के उन कट्टरपंथी समूहों से अलग है जो मणिपुर की स्वतंत्रता (sovereignty) की मांग करते हैं।


13 अप्रैल को Imphal में एक पारंपरिक कार्यक्रम में, Sanajaoba ने कहा:


  • AT को मणिपुर और भारत की संस्कृति, पहचान और जमीन की रक्षा के लिए बनाया गया है।
  • “हम anti-national नहीं हैं। अगर ज़रूरत पड़ी, तो हम फिर हथियार उठाकर अपने राज्य की रक्षा करेंगे।”






निष्कर्ष



Manipur का संकट सिर्फ एक ethnic conflict नहीं है, बल्कि यह राज्य की सामाजिक, राजनीतिक और ऐतिहासिक अस्थिरता को भी दर्शाता है। Arambai Tenggol जैसे संगठनों का उभार, हथियारों का खुला उपयोग, और राजनीतिक संरक्षण मिलना – ये सभी लोकतंत्र और कानून व्यवस्था के लिए चुनौती हैं। यह ज़रूरी है कि राज्य में शांति स्थापित हो और सभी समुदायों को बराबर सुरक्षा व सम्मान मिले।





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