एनडीपीएस (संशोधन) विधेयक, 2021
नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (संशोधन) विधेयक, 2021
why we need सीतारमण ने कहा -
कि बंबई उच्च न्यायालय की गोवा पीठ ने 2014 में संबंधित कानून में हुए संशोधन में विसंगति की ओर इशारा किया था। सीतारमण ने कहा कि यही मामला त्रिपुरा उच्च न्यायालय में भी आया और उसने विसंगति को तत्काल सुधारने की बात कही।त्रिपुरा उच्च न्यायालय ने कहा था कि स्वापक औषधि एवं मन:प्रभावी पदार्थ अधिनियम (एनडीपीएस) की धारा 27क का संशोधन करके जब तक समुचित विधायी परिवर्तन नहीं होता है और उसके स्थान पर एनडीपीएस अधिनियम की धारा 2 के खंड 8ख के उपखंड 1 से उपखंड 5 रख नहीं दिये जाते हैं तब तक एनडीपीएस अधिनियम की धारा 2 के खंड 8ख के उपखंड 1 से उपखंड 5 लोप या निरस्तता के प्रभाव से प्रभावित होते रहेंगे।इसमें कहा गया है कि एनडीपीएस की धारा 27क की विसंगति को ठीक करने के लिये धारा 27क के खंड 8क के स्थान पर 8ख प्रतिस्थापित करने का निर्णय किया गया है ताकि इसके विधायी आशय को पूरा किया जा सके।
उन्होंने कहा कि इसलिए विसंगति को दूर करने के लिए अध्यादेश लाया गया। इस संशोधन में उस सुधार के अलावा और कुछ नहीं है।
कि बंबई उच्च न्यायालय की गोवा पीठ ने 2014 में संबंधित कानून में हुए संशोधन में विसंगति की ओर इशारा किया था। सीतारमण ने कहा कि यही मामला त्रिपुरा उच्च न्यायालय में भी आया और उसने विसंगति को तत्काल सुधारने की बात कही।
उन्होंने कहा कि इसलिए विसंगति को दूर करने के लिए अध्यादेश लाया गया। इस संशोधन में उस सुधार के अलावा और कुछ नहीं है।
NDPS अधिनियम की धारा 27A:
- धारा 27A के तहत शामिल प्रावधान के मुताबिक, धारा 2 के खंड (viiia) के उप-खंड (i) से (v) में निर्दिष्ट किसी भी गतिविधि में प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से शामिल कोई भी व्यक्ति अथवा उपरोक्त किसी भी गतिविधि में संलग्न किसी व्यक्ति को सुरक्षा प्रदान करने वाला कोई भी व्यक्ति अधिनियम के तहत दंड का पात्र होगा।
- ऐसे व्यक्ति को कठोर कारावास की सज़ा दी जाएगी, जिसकी अवधि दस वर्ष से कम नहीं होगी और जिसे बीस वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है, साथ ही उस व्यक्ति पर जुर्माना भी लगाया जा सकता है, जो कि एक लाख रुपए से कम नहीं होगा, किंतु यह दो लाख रुपए से अधिक भी नहीं होगा।
- हालाँकि निर्णय में दिये गए कारणों के आधार पर दो लाख रुपए से अधिक का जुर्माना भी लगाया जा सकता है।
- धारा 27A के तहत शामिल प्रावधान के मुताबिक, धारा 2 के खंड (viiia) के उप-खंड (i) से (v) में निर्दिष्ट किसी भी गतिविधि में प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से शामिल कोई भी व्यक्ति अथवा उपरोक्त किसी भी गतिविधि में संलग्न किसी व्यक्ति को सुरक्षा प्रदान करने वाला कोई भी व्यक्ति अधिनियम के तहत दंड का पात्र होगा।
- ऐसे व्यक्ति को कठोर कारावास की सज़ा दी जाएगी, जिसकी अवधि दस वर्ष से कम नहीं होगी और जिसे बीस वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है, साथ ही उस व्यक्ति पर जुर्माना भी लगाया जा सकता है, जो कि एक लाख रुपए से कम नहीं होगा, किंतु यह दो लाख रुपए से अधिक भी नहीं होगा।
- हालाँकि निर्णय में दिये गए कारणों के आधार पर दो लाख रुपए से अधिक का जुर्माना भी लगाया जा सकता है।
नशीली दवाओं की लत से निपटने की संबंधी पहल
- नार्को-समन्वय केंद्र: नार्को-समन्वय केंद्र (NCORD) का गठन नवंबर 2016 में किया गया था और ‘नारकोटिक्स नियंत्रण के लिये राज्यों को वित्तीय सहायता’ योजना को पुनर्जीवित किया गया था।
- ज़ब्ती सूचना प्रबंधन प्रणाली: ‘नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो’ को एक नया सॉफ्टवेयर यानी ‘ज़ब्ती सूचना प्रबंधन प्रणाली’ (SIMS) विकसित करने के लिये धन उपलब्ध कराया गया है जो नशीली दवाओं के अपराध और अपराधियों का एक पूरा ऑनलाइन डेटाबेस तैयार करेगा।
- नेशनल ड्रग एब्यूज़ सर्वे: सरकार ‘एम्स’ के नेशनल ड्रग डिपेंडेंस ट्रीटमेंट सेंटर की मदद से सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के माध्यम से भारत में नशीली दवाओं के दुरुपयोग के रुझानों को मापने हेतु राष्ट्रीय नशीली दवाओं के दुरुपयोग संबंधी सर्वेक्षण भी कर रही है।
- प्रोजेक्ट सनराइज़: इसे स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा 2016 में भारत में उत्तर-पूर्वी राज्यों में बढ़ते एचआईवी प्रसार से निपटने के लिये शुरू किया गया था, खासकर ड्रग्स का इंजेक्शन लगाने वाले लोगों के बीच।
- NDPS अधिनियम: यह व्यक्ति को किसी भी मादक दवा या मनोदैहिक पदार्थ के उत्पादन, रखने, बेचने, खरीदने, परिवहन, भंडारण और/या उपभोग करने से रोकता है।
- NDPS अधिनियम में अब तक तीन बार 1988, 2001 और 2014 में संशोधन किया गया है।
- यह अधिनियम पूरे भारत के साथ-साथ भारत के बाहर के सभी भारतीय नागरिकों और भारत में पंजीकृत जहाज़ो एवं विमानों पर कार्यरत सभी व्यक्तियों पर भी लागू होता है।
- नशा मुक्त भारत: सरकार ने 'नशा मुक्त भारत' या ड्रग मुक्त भारत अभियान शुरू करने की भी घोषणा की है जो सामुदायिक आउटरीच कार्यक्रमों पर केंद्रित है।
source the hindu
- नार्को-समन्वय केंद्र: नार्को-समन्वय केंद्र (NCORD) का गठन नवंबर 2016 में किया गया था और ‘नारकोटिक्स नियंत्रण के लिये राज्यों को वित्तीय सहायता’ योजना को पुनर्जीवित किया गया था।
- ज़ब्ती सूचना प्रबंधन प्रणाली: ‘नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो’ को एक नया सॉफ्टवेयर यानी ‘ज़ब्ती सूचना प्रबंधन प्रणाली’ (SIMS) विकसित करने के लिये धन उपलब्ध कराया गया है जो नशीली दवाओं के अपराध और अपराधियों का एक पूरा ऑनलाइन डेटाबेस तैयार करेगा।
- नेशनल ड्रग एब्यूज़ सर्वे: सरकार ‘एम्स’ के नेशनल ड्रग डिपेंडेंस ट्रीटमेंट सेंटर की मदद से सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के माध्यम से भारत में नशीली दवाओं के दुरुपयोग के रुझानों को मापने हेतु राष्ट्रीय नशीली दवाओं के दुरुपयोग संबंधी सर्वेक्षण भी कर रही है।
- प्रोजेक्ट सनराइज़: इसे स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा 2016 में भारत में उत्तर-पूर्वी राज्यों में बढ़ते एचआईवी प्रसार से निपटने के लिये शुरू किया गया था, खासकर ड्रग्स का इंजेक्शन लगाने वाले लोगों के बीच।
- NDPS अधिनियम: यह व्यक्ति को किसी भी मादक दवा या मनोदैहिक पदार्थ के उत्पादन, रखने, बेचने, खरीदने, परिवहन, भंडारण और/या उपभोग करने से रोकता है।
- NDPS अधिनियम में अब तक तीन बार 1988, 2001 और 2014 में संशोधन किया गया है।
- यह अधिनियम पूरे भारत के साथ-साथ भारत के बाहर के सभी भारतीय नागरिकों और भारत में पंजीकृत जहाज़ो एवं विमानों पर कार्यरत सभी व्यक्तियों पर भी लागू होता है।
- नशा मुक्त भारत: सरकार ने 'नशा मुक्त भारत' या ड्रग मुक्त भारत अभियान शुरू करने की भी घोषणा की है जो सामुदायिक आउटरीच कार्यक्रमों पर केंद्रित है।
source the hindu
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