यह लेख अमेरिका में धनिक वर्ग की राजनीतिक और आर्थिक नीतियों पर बढ़ती पकड़ को समझाने का प्रयास करता है, विशेष रूप से डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में इसे "नए गिल्डेड एज" (New Gilded Age) के रूप में देखा जा रहा है।
### **ट्रंप प्रशासन और अरबपतियों का दबदबा**
लेख बताता है कि डोनाल्ड ट्रंप का दूसरा प्रशासन पहले की तुलना में भी अधिक धनवान है।
इस प्रशासन में कुल संपत्ति $460 बिलियन है और इसके 16 सदस्य अरबपति हैं।
जब लोकतांत्रिक व्यवस्था में 0.0001% आबादी राजनीतिक और आर्थिक निर्णयों पर अत्यधिक प्रभाव डालती है, तो यह एक प्रकार के कुलीनतंत्र (Oligarchy) के संकेत देता है।
अमेरिका की अर्थव्यवस्था पहले से ही असमानता से ग्रसित है
जहां शीर्ष 1% लोगों के पास देश की 31% संपत्ति है। धनिक वर्ग केवल अप्रत्यक्ष रूप से नीति निर्माण को प्रभावित नहीं करता, बल्कि सीधे प्रशासन में शामिल होकर सत्ता पर कब्जा कर रहा है।
उदाहरण के लिए, एलन मस्क, जो ट्रंप प्रशासन को $250 मिलियन का चंदा दे चुके हैं, अब सरकार की दक्षता (Efficiency) के विभाग का नेतृत्व कर रहे हैं।
### **जनता पर प्रभाव और संभावित हितों का टकराव*
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संपत्ति किसी व्यक्ति को सरकार में शामिल होने से नहीं रोकती, लेकिन इससे हितों का टकराव (Conflict of Interest) उत्पन्न हो सकता है। ट्रंप प्रशासन में कई बड़े कारोबारी महत्वपूर्ण पदों पर बैठे हैं:
- वाणिज्य सचिव (Commerce Secretary) – एक वित्तीय सेवा कंपनी के सीईओ हैं।
- ट्रेजरी सचिव (Treasury Secretary) – निवेश फर्म के मालिक हैं।
- नासा प्रमुख – निजी अंतरिक्ष अन्वेषण में अग्रणी हैं।
- व्हाइट हाउस ए.आई. और क्रिप्टो प्रमुख – पेपाल के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी हैं।
एक मूलभूत प्रश्न यह है कि **क्या अरबपति जनसाधारण की समस्याओं को समझ सकते हैं?
** जब एलन मस्क अमेरिकी बजट में $2 ट्रिलियन की कटौती की बात करते हैं, तो वे इसे "अस्थायी कठिनाई" बताते हैं, लेकिन यह आम लोगों के लिए गंभीर संकट पैदा कर सकता है।
ट्रंप प्रशासन के पहले कार्यकाल में कई नीतियां बनाई गईं, जिनका लाभ मुख्य रूप से अमीरों को मिला:
- **टैक्स कटौती अधिनियम (Tax Cuts and Jobs Act, 2017):** इस कानून से 80% कर लाभ धनी व्यक्तियों और कंपनियों को मिला।
- **पेरिस जलवायु समझौते से बाहर निकलना:** जीवाश्म ईंधन कंपनियों के लिए अनुकूल माहौल बना।
- **स्वास्थ्य सेवाओं में कटौती:** ‘Affordable Care Act’ को कमजोर किया गया, जिससे बिना बीमा वाले लोगों की संख्या बढ़ गई।
### **पूंजीवाद, असमानता और मजदूर वर्ग**
आर्थिक नीति संस्थान (Economic Policy Institute) के अनुसार:
- 1973 से 2013 तक श्रमिकों की मजदूरी मात्र 9% बढ़ी, जबकि उत्पादकता 74% बढ़ी।
- शीर्ष वेतन पाने वालों की आय 41% बढ़ी, जबकि मध्यम वर्ग की मजदूरी स्थिर रही और निम्न वर्ग की मजदूरी में 5% की गिरावट आई।
- 1965 में एक सीईओ की आय औसत कर्मचारी की तुलना में 20 गुना थी, जो 2000 के दशक में बढ़कर 383 गुना हो गई।
इस असमानता के कारण अमेरिका में "अरबपतियों की अधिकता" (Overproduction of Wealthy People) हो गई है, जिससे अधिक लोग राजनीतिक सत्ता की ओर बढ़ रहे हैं।
### **क्या यह केवल ट्रम्प के कार्यकाल में ही बाद हो रहा है ????**
इस असमानता को सिर्फ ट्रंप प्रशासन तक सीमित नहीं किया जा सकता। यह डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन दोनों पार्टियों की आर्थिक नीतियों का परिणाम है:
- **ट्रंप के पहले कार्यकाल में कॉरपोरेट मुनाफा $2 ट्रिलियन तक था, जो 2024 में जो बाइडेन के कार्यकाल में $3.17 ट्रिलियन तक पहुंच गया।**
- **ट्रंप के लिए 14 अरबपतियों ने चंदा दिया , जबकि कमला हैरिस के लिए 21 अरबपतियों ने।**
- **ट्रंप के पहले प्रशासन की कुल संपत्ति $6.2 बिलियन थी, जबकि ओबामा के दूसरे कार्यकाल की कुल संपत्ति $2.8 बिलियन थी।**
इसका अर्थ यह है कि **धन का केंद्रीकरण और श्रमिक वर्ग की असुरक्षा केवल ट्रंप प्रशासन की देन नहीं है, बल्कि यह एक संरचनात्मक समस्या है।**
### **ट्रंप और आर्थिक रूप से हाशिए पर पड़े लोग**
विडंबना यह है कि ट्रंप आर्थिक रूप से हाशिए पर पड़े लोगों की नाराजगी को भुनाने में सफल रहे हैं।
दार्शनिक रिचर्ड रॉर्टी ने 1998 में भविष्यवाणी की थी कि जब औद्योगिक मजदूर वर्ग खुद को ठगा हुआ महसूस करेगा, तो वे एक "सशक्त नेता" की तलाश करेंगे, जिससे सामाजिक अल्पसंख्यकों को नुकसान हो सकता है।
### **वैश्विक प्रभाव**
देखिए कहाँ कितने अमीर लोग राजनीति में
- अमेरिका में केवल 3.5% अरबपति राजनीति में जाते हैं,
- जबकि चीन (36%)
- और रूस (21%) में यह संख्या अधिक है।
इसके बावजूद, अमेरिका में **लोकतंत्र के भीतर अरबपतियों का बढ़ता प्रभुत्व वैश्विक राजनीति के लिए चिंता का विषय बन गया है।**
### **निष्कर्ष**
क्या कर सकते हैं:
1. चुनावी सुधार:
• पैसे की राजनीति पर नियंत्रण: चुनावों में अरबपतियों का अत्यधिक हस्तक्षेप रोकने के लिए पब्लिक फंडिंग और कर्पोरेट डोनेशन पर सख्ती लागू करनी होगी।
• “Citizens United” फैसले की समीक्षा: अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले ने कॉरपोरेट फंडिंग को असीमित कर दिया था। इसे पलटने के लिए संवैधानिक संशोधन या नए कानून लाए जा सकते हैं।
2. टैक्स सिस्टम में सुधार:
• अरबपतियों पर वेल्थ टैक्स (संपत्ति कर) और कैपिटल गेन टैक्स (पूंजीगत लाभ कर) बढ़ाया जाए ताकि वे लोकतांत्रिक संस्थानों को खरीद न सकें।
• टैक्स हेवन (Tax Havens) के जरिए जो अरबपति कर चोरी करते हैं, उन पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोक लगाई जाए।
3. पारदर्शिता और जवाबदेही:
• राजनीतिक चंदे और लॉबिंग पर कड़ी निगरानी के लिए सख्त पारदर्शिता कानून बनाए जाएं।
• “Revolving Door” (जहां बड़े उद्योगपति सरकारी पदों पर जाते हैं और फिर कंपनियों में लौट आते हैं) पर नियंत्रण हो।
4. मीडिया और जन-जागरूकता:
• अरबपतियों द्वारा मीडिया संस्थानों पर नियंत्रण को रोकने के लिए मीडिया स्वामित्व कानून लागू किए जाएं।
• आम जनता को राजनीतिक और आर्थिक असमानता के प्रभावों के प्रति शिक्षित किया जाए।
5. वैश्विक सहयोग:
• अंतरराष्ट्रीय संगठनों (जैसे UN, OECD) के जरिए अरबपतियों द्वारा लोकतंत्र को प्रभावित करने पर रोक लगाने की पहल हो।
• बहुपक्षीय समझौतों के माध्यम से अरबपतियों के अवैध फंड मूवमेंट और राजनीति में दखल को सीमित किया जाए।
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