India and Vietnam signed (MoU) for promoting scientific and technical cooperation in marine science and ecology

 

भारत और वियतनाम ने  समुद्र विज्ञान तथा पारिस्थितिकी में वैज्ञानिक तथा तकनीकी सहयोग को बढ़ावा देने के लिए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए

समुद्री परिसंपत्तियों की खोज विश्व समुद्री अर्थव्यवस्था में अंतरराष्ट्रीय सहयोग के एक नए युग का सूत्रपात करेगी।  द्विपक्षीय समझौता 

  • तटीय रेखा परिवर्तन,
  •  तलछट्ट परिवहन दर,
  •  तटीय सुरक्षा उपायों से संबंधित सूचना 
  • और संसाधन साझा करने का मार्ग प्रशस्त होगा। 

डॉ. सिंह ने कहा कि वियतनाम की तरफ से तथा भारतीय विशेषज्ञों द्वारा अग्रगामी स्थान की पहचान एक तटीय सुरक्षा समाधान विकसित करने में तकनीकी सहायता उपलब्ध कराएगी।

नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सामुद्रिक वैज्ञानिक अनुसंधान में अग्रिम पंक्ति के देशों में एक के रूप में उभरा है और अब यह देश के लिए भविष्य की ऊर्जा तथा धातु मांगों को पूरा करने के लिए संसाधनों से पूर्ण महासागर तल की खोज में सक्रियतापूर्वक जुड़ा है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार द्वारा शुरु की गई ‘‘गहरा महासागर मिशन‘‘ ने ‘ब्लू इकानोमी‘ को समृद्ध बनाने के लिए विभिन्न संसाधनों के एक और क्षितिज का सूत्रपात किया है।


भारत और वियतनाम

  •  समुद्र विज्ञान में अनुसंधान को आगे बढ़ाने, 
  • महासागरों की और अधिक मौलिक समझ अर्जित करने 
  • और समग्र रूप् से समाज को लाभान्वित करने के लक्ष्यों के साथ
  •  मूलभूत वैज्ञानिक और व्यवहारिक अनुसंधान को और आगे बढ़ाने के लिए सहयोग की शुरुआत करेंगे। 
  • उन्होंने कहा कि दोनों ही देशों ने समुद्र विज्ञान तथा पारिस्थितिकी के क्षेत्रों में सहयोगात्मक अनुसंधान करने पर भी सहमति जताई है और निकट भविष्य में दोनों ही देशों द्वारा समान हितों के क्षेत्र में इन्हें आरंभ किया जाएगा

दीर्घकालिक महासागर योजना निर्माण तथा महासागर प्रबंधन संसाधनों  

वियतनाम के प्राकृतिक संसाधन तथा पर्यावरण मंत्री (एमओएनआरई) श्री ट्रान होंग हा ने दीर्घकालिक महासागर योजना निर्माण तथा महासागर प्रबंधन संसाधनों में भारत से सहायता प्राप्त करने की इच्छा व्यक्त की। 

 महासागर परिसंपत्ति अन्वेषण में सहयोग  

श्री ट्रान होंग हा ने महासागर परिसंपत्ति अन्वेषण में सहयोग को सुदृढ़ बनाने के लिए दोनों देशों के वैज्ञानिकों एवं विशेषज्ञों की नलाइन बातचीत को भी रेखांकित किया।

 एमओयू के तहत सहयोग के सात प्रमुख क्षेत्र  

दोनों देशों द्वारा सहमत भारत-वियतनाम एमओयू के तहत सहयोग के सात प्रमुख क्षेत्र हैं।

 सहयोग के इन चिन्हित क्षेत्रों का उद्देश्य भारत और वियतनाम द्वारा समुद्री संसाधनों का सतत विकास करना है। प्रमुख क्षेत्र हैं

  •  तटीय क्षरण और संवेदनशीलता, 
  • तटीय प्रबंधन, 
  • समुद्री पारिस्थितिकी और महत्वपूर्ण वासों की निगरानी और मानचित्रण,
  •  महासागर अवलोकन प्रणाली,
  •  समुद्री प्रदूषण तथा सूक्ष्म प्लास्ट्क्सि,
  •  समुद्री मौसम पूर्वानुमान और
  •  क्षमता निर्माण।

सूचना के आदान प्रदान को सुगम  

एमओयू के एक हिस्से के रूप में, दोनों देश वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं, तकनीकी विशेषज्ञों, परियोजनाओं और समुद्री विज्ञान और प्रौद्योगिकी में सूचना के आदान प्रदान को सुगम बनाएंगे।


 वे ज्ञान, मौलिक अनुसंधान और महासागर के स्वास्थ्य और संसाधनों के वृहद लाभ की समझ को बढ़ाने में एक दूसरे की सहायता करेंगे।


 एक संयुक्त समिति की स्थापना 

  •  सहयोग के नए क्षेत्रों, 
  • कार्यक्रमों एवं प्रस्तावों को तैयार करने,
  •  एमओयू अधिदेशों के लिए योजना बनाने 
  • तथा उन्हें कार्यान्वित करने के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने,
  •  प्रशासनिक और तकनीकी प्रक्रियाओं पर निर्णय करने तथा 
  • कार्य की प्रगति की निगरानी करने से संबंधित सुझाव देने के लिए एक संयुक्त समिति की स्थापना भी की जाएगी।

संयुक्त राष्ट्र संघ ने इस दशक को महासागर के दशक के रूप में मान्यता दी

भारत-वियतनाम एमओयू तब और भी महत्वपूर्ण और प्रासंगिक बन जाता है जब संयुक्त राष्ट्र संघ ने इस दशक को महासागर के दशक के रूप में मान्यता दी है।

 पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय 

अवलोकन, पूर्वानुमानों, अनुसंधान एवं विकास तथा संसाधनों के सतत उपयोग जैसे परस्पर आपसी समाजगत लाभ के क्षेत्रों में सहयोग करने के लिए इच्छुक है।

यह एमओयू पांच वर्षों की अवधि के लिए वैध बना रहेगा और उसके बाद के पांच वर्षों की अवधि के लिए केवल एक बार स्वाभविक रूप से इसका नवीनीकरण हो जाएगा। इन दोनों में से कोई भी एक देश एमओयू की समाप्ति से पूर्व इस एमओयू को खत्म करने के इरादे से कम से कम छह महीने पहले दूसरे देश को लिखित नोटिस दे सकता है।


source pib 

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