U.N. Global Stocktake report

यू.एन. ग्लोबल स्टॉकटेक रिपोर्ट’ 

U.N. Global Stocktake report

दुनिया को जलवायु संबंधी वार्ताओं से वास्तविक सफलताओं की जरूरत है

 

जलवायु संकट का मसला


दिल्ली में आयोजित जी-20 शिखर सम्मेलन के दौरान विशेष रूप से स्वच्छ ऊर्जा, सतत विकास और इस संकट को रोकने के लिए आवश्यक सामूहिक जिम्मेदारी पर चर्चा के दौरान जटिल रूप से उभरा। 


जी-20 की बैठक से ठीक पहले जारी की गई संयुक्त राष्ट्र संघ की ‘ग्लोबल स्टॉकटेक’ नाम की एक रिपोर्ट ने उन चुनौतियों का दायरा निर्धारित किया, जो दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के सामने  खड़ी हैं। 


रिपोर्ट में पहले से ज्ञात तथ्यों से शायद ही कुछ ज्यादा परोसा गया  


यह एक अलग बात है कि इस रिपोर्ट में पहले से ज्ञात तथ्यों से शायद ही कुछ ज्यादा परोसा गया है।


 यह ‘स्टॉकटेक’ इस नवंबर में दुबई में होने वाले 28वें पार्टियों के सम्मेलन से पहले चर्चा का मार्गदर्शन करने के लिए एक नमूने (टेम्पलेट) के रूप में काम करेगा 


और इसका मकसद ग्रीनहाउस गैसों (जीएचजी) के उत्सर्जन को रोकने के लिए 2015 के बाद से विभिन्न देशों द्वारा वास्तव में किए गए कार्यों की आधिकारिक हिसाब रखना है।


Peris agreement 

 उस साल, जलवायु परिवर्तन से संबंधित संयुक्त राष्ट्र संघ के करार पर हस्ताक्षर करने वाले देश पेरिस में वैश्विक उत्सर्जन को दो डिग्री सेल्सियस से अधिक बढ़ने से रोकने 


और जहां तक संभव हो, इसे 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखने पर सहमत हुए थे।


some success 

 भले ही यह रिपोर्ट “कुछ” प्रगति को स्वीकार करती है, लेकिन दुनिया अब तक जिस तरह से इन गैसों का उत्सर्जन कर रही है वह निश्चित रूप से पेरिस में सहमत सीमा से पार चली जाएगी।


 इस रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि 2030 तक वैश्विक जीएचजी उत्सर्जन को 43 फीसदी, 2035 तक 60 फीसदी तक कम करने और 2050 तक वैश्विक स्तर पर कार्बन डाइऑक्साइड के शुद्ध शून्य उत्सर्जन के लक्ष्य तक पहुंचने के लिए


 घरेलू स्तर पर कमी लाने वाले उपायों को लागू करने के लिए “कार्रवाई और समर्थन के मोर्चे पर बहुत ज्यादा महत्वाकांक्षी होने” की जरूरत है।


 विभिन्न देशों द्वारा पेश की गई वर्तमान जानकारी के आधार पर

 2030 में 1.5 डिग्री सेल्सियस के अनुरूप उत्सर्जन अंतराल 20.3 बिलियन टन-23.9 बिलियन टन कार्बन डाइऑक्साइड होने का अनुमान है।


 नवीकरणीय ऊर्जा संसाधनों में तेजी से बढ़ोतरी किए और कोयला, तेल एवं प्राकृतिक गैस जैसे जीवाश्म ईंधन के स्रोतों को त्यागे बिना इस अंतराल को पाट पाने की संभावना नहीं है।


 कोयला-आधारित बिजली -

  ऊर्जा परिवर्तन के मामले में बहुत कम उपलब्धि हासिल हुई है। जी-20 देशों में वैश्विक स्तर पर चलने वाले कुल कोयला-आधारित बिजली संयंत्रों का 93 फीसदी और भावी संयंत्रों का 88 फीसदी हिस्सा मौजूद है।


G 20 SUMMIT 

जी-20 के नेताओं की घोषणा में औपचारिक रूप से “... विकासशील देशों के लिए 2030 से पहले की अवधि में 5.8-5.9 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की जरूरत ... 


साथ ही 2050 तक शुद्ध शून्य के लक्ष्य तक पहुंचने वास्ते 2030 तक स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकियों के लिए प्रति वर्ष 4 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की जरूरत” को मान्यता दी गई है।


 रिपोर्ट में वनों की कटाई को रोकने और स्वच्छ ऊर्जा अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण पहलुओं के रूप में इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने की जरूरत पर भी जोर दिया गया है। 


हालांकि, यह अलग-अलग देशवार जानकारी या उत्सर्जन को कम करने के लिए विभिन्न देशों द्वारा अपनाए गए दृष्टिकोण में मौजूदा कमियों का ज्यादा विस्तृत विश्लेषण नहीं पेश करता है। 


इस ‘स्टॉकटेक’ रिपोर्ट को हालांकि एक अन्य तकनीकी दस्तावेज मानकर खारिज नहीं किया जाना चाहिए। आगामी जलवायु वार्ताओं के दौरान, इसे वास्तविक सफलताओं की तलाश और उन्हें अपनाने में सहायता के लिए बातचीत का आधार बनाना चाहिए।

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